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रामायण में एक घास के तिनके का भी रहस्य है,जो हर किसी को नहीं मालूम क्योंकि आज तक हमने हमारे ग्रंथो को सिर्फ पढ़ा,समझने की कोशिश नहीं की। read more >>
(दोहा छंद) मुझको तुमसे प्यार है,तुम हो दिव्य सवाल। तुम ही मेरी हो जहां,करती दूर बवाल।। चिन्तन तेरी मैं करूं,तेरा बनूं जवाब। तेरी हर उम read more >>
एक व्यक्ति को रास्ते में यमराज मिल गये वो व्यक्ति उन्हें पहचान नहीं सका। यमराज ने पीने के लिए पानी मांगा उस व्यक्ति ने उन्हें पानी पिल read more >>
कल्पना कीजिए कि आपके पास एक बैंक अकाउंट है और हर रोज सुबह उस बैंक अकाउंट में 86,400 रूपये जमा हो जाते है, जिसे आप उपयोग में ले सकते है| आप रूप� read more >>
मेरी मैया कृपा बरसाने वाली, सबको सहारा देने वाली, हाथ पकड़‌ लेती जो लेता नाम उसका, भव से पार लगाने वाली। जय मां लक्ष्मी read more >>
तेरी कृपा से मैया बिगड़ी बने, भक्तों की झोली भरे, तेरी नाम से बनती हैं किस्मत, तेरे नाम से नैया पार लगे। read more >>
मुक्तक छंद "सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" आज रात है अति खुशी,होगा भव्य विवाह। हृदय मिलेंगे झूम कर,होगी नूतन चाह। खुशियों की बरसात से,महफ� read more >>
कुंडलिया छंद "सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माया से संसार है,सबका अपना दाम। खुद को तुम अति योग्य कर,करिए सुंदर काम।। करिए सुन्दर काम,समा read more >>
_कुंडलिया छंद "सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माया में सब लीन है,भूल गए हैं मूल्य। सब रह जायेगा यहीं,जाओगे बन शून्य।। जाओगे बन शून्य,जन्म � read more >>
मुक्तक छंद "सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" लालच जो मैं किया, बुरा हुआ तब हाल। छूटा सब दोस्त है,गड़बड़ है अब काल। बस पछतावा मिले, कुछ कर नही� read more >>
मुक्तक छंद "सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" रहिए सदा उदार मन, करिए कभी न लोभ। खुशियों की बरसात हो, दूर रहे तब छोभ। सपने सब मंसूब हो,फैले जग म� read more >>
लहरों की स्वर सुनो, धीरे से आओ, खुशबू सी लेकर, सपनों को सजाओ। समुंदर के तट पर ये ध्वनि बहती है, अजनबी सी है और बेहद खूबसूरती है। चलो, लहर� read more >>
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