हम यूं ही बोझ उठाते रहे ,
लोग आते रहे लोग जाते रहे ,
मेहरबानी उस अल्लाह _ताला की __
जिसकी बदौलत हम चार पैसे कमाते रहे ।
___शिव किशोर ,शाहजहां� read more >>
न जाने !मन में कितनी उलझन है! इन उलझनों को सुलझाने का! कोई एक रास्ता तो दो!
कहनी है बहुत कुछ तुमसे !
कभी मेरी भी बातों को
सुनने को एक शाम त� read more >>
कई साल बीत गया उस घर को छोड़े मैंने अपनी एक नई दुनिया बसा ली फिर भी न जाने क्यों कभी-कभी एकांत में बैठने पर मुझे उस घर का हर एक कोना हर एक प read more >>
आज सुबह जब मैं नींद से जगा और सामने देखा,
प्रभात की खुशबू से वातावरण सुरभित था।
बड़ा मन ही मन आनंद का अहसास हो रहा था,
और लग रहा था की आज � read more >>