दिनांक __30 /1 /2026
काव्य --- जब जब फूल खिले
बसंत ऋतु के आने पर इन रंग बिरंगे फूलों ने किया है क्या? खूब श्रंगार !
मत तोड़ो? इन फूलों को इनमें
छु read more >>
मतला:
वक़्त के आईने में मेरा सच नज़र आता है,
जो मैं बनकर चलता हूँ, वही रूप बन जाता है।
हर लम्हा सवाल बनकर रूह से टकराता है,
मेरी खामोशी क� read more >>
दैनिक काव्य सृजन
दिन- बुधवार
दिनांक 21 -1 _2026
शीर्षक ----यादें ही यादें
जब शाम ढले मेरे घर पर यादों
की दस्तक होती है
मन फिर बेचैन होकर न जा� read more >>