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अहंकार
अहंकार * मानवता का आदर्श मर्यादा से अभिसिंचित होता है । मनुष्य का मनुष्य के प्रति व्यवहार मर्यादा से ही आबद्ध रहता है, शरीर में जैसे त�
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जाति भेद
क्युं जाति के नाम पर गुनाह हजारों पल रहे हैं, उच्च नीच की तराजू में नित तोल रहे हैं । क्या ठप्पा लगाकर आए थे सब के मैं धनी तु निर्
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तेरी बातों का मेरे पास कोई जवाब नहीं है
तेरी बातों का मेरे पास कोई जवाब नहीं है, अब मेरी आँखों में तेरे सिवा कोई ख्वाब नहीं है, तुम मत पूछो मुझे कितनी मोहब्बत है तुमसे, इतना ह�
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कोई नहीं मेरा तेरे बिना और हर जहां अधूरा है सब कुछ
कोई नहीं मेरा तेरे बिना और हर जहां अधूरा है जब तक तू नहीं है मेरी दुनिया में सब अकेले अकेले या अधुरा है l By : Radhepriyesachin
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मुद्दत के बाद मौसम आई है
दिलें दीवार में पड़ी यादों की, धुंधली सी छवि थी सहारा। आज पत्थराई नैन छलकी है, मुद्दत के बाद मौसम आई है।। सितारों से भरी ये रातें, चा�
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मेरे ज़मीर की रोशनी में
मेरे ज़मीर- की रोशनी में नहाई, ये जीवन दमक रही है सूरज की- सतरंगी किरण से संवरते दिन के ये रंग में फुलते और फलते ज़िंदगी रात चांँद से
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भारत मां के शेर बनो-मेरे देश के रखवालों मेरी मर्जी जानो
मेरे देश के रखवालों मेरी मर्जी जानो, तुम लेके उड़ो तिंरगे देश की शान संभालो। हम बच्चे हुए जवां हैं अपनी एक टीम बनाए, हर एक बच्चे में अब �
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जिक्र कभी ज़ालिम का
जब भी होता है जिक्र कभी ज़ालिम का, आ जाता है ज़ुबान पर नाम हाकिम का। जस्न मनाते है लोक सोर मचा-मचा के, पर होता नहीं सोर कभी भी मातम का। �
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दुनियां क्या सोचती है
दुनियां क्या सोचती है ए सोचते रह जाओगे तो कभी आगे नहीं बढ़ पा ओगे क्योंकि नीचे गिराने वाले बहुत मिलेंगे पर उठाकर आगे बढ़ाने वाले बहु�
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दूर तुमसे न जाएंगे हम
दूर तुमसे न जाएंगे हम लो ए वादा किया सनम फासलें आ जाएं कितनी भी प्यार होगा न हमारे दरमिया कभी कम शिकवा ,शिकायतें, गिला सब कर लेना मगर
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मुहोबत का घुआँ
थे फैसले सारे । खुदा के तो ये कैसे हुआ ? उठा कैसे दिल में. मुहोबत का घुआँ ,। हाँ ।ये...... ? तुझे छु के यो बिजली सी दौड़ गई सारे बदन मे,...... बद�
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शायरी
ख्वाब उनकी आखों में है, और नींद हमे नही आती। खुदा करे की उनके सारे ख्वाब पुरे हो जाये । सूकून उनके दिल को आये, और चैन से हम सो पाये। सचिन
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