जब आंख खुली तो मां की गोदी का एक सहारा था,
उसका आंचल मुझको भूमंडल से प्यारा था ,
उसका स्तन पान किया तो मैंने जीवन पाया था,
मुझको बढ़ता दे� read more >>
लेख- अनुपम सूक्तियां।
लेखक- जितेन्द्र शर्मा।
08/05/2023
निवेदन- किसी रचना से कुछ ऐसा अमूल्य निकलता है जिसको संकलित करना कभी कभी बहुत उपयोग� read more >>
लाल लाल,हम सब हैं लाल ।देव भी लाल, दानव भी लाल,हम सब हैं लाल लाल।।देव तो कुमकुम से लाल,दानव तो रक्त से लाल,हम सब हैं अपनी खुशी में लाल ‌‌ read more >>
ना कोई नसा , ना कोई लत
ना ही किसी से बैर......
करते वो खुद अपना काम
और साथ ही बटाते घर में हाथ......
देते सम्मान बेटियों को , कभी ना करते फर्क
जि� read more >>
शहर मैं जब आया ,
थोड़ा सा घबराया ,
देख उसकी भव्यता को,
मन मेरा सकुचाया,
मन मेरा उदास था ,
घर न मेरे पास था।
पर मुझपे भी जिम्मेदारी थी।
मां read more >>