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मृत्यु का सच
मृत्यु होता है क्या मृत्यु का राज खोलती है प्रकृति इसे आज ! परिभाषा है चेतना की खास जुड़ी है प्रभु प्राप्ति की आस! होता है जब शरी�
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“સામે હતું”
દરવાજા બે હતા, છતાં એક જ રસ્તો સામે હતો; મળવાનું નસીબ ક્યાં? સમયનો પહેરો સામે હતો. બારીમાં દીવો રોજ સાંજે ધીમે ધીમે ઝળહળતો, મારી આંખો સ
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नहीं समझते भाव सभी
नहीं समझते भाव सभी, अच्छे मन के विचार, जैसी मत है वो, वैसा समझे कैसे उसको समझाये।
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सबसे बड़ा कर्म
सबसे बड़ा कर्म है, दिल ना किसी का दुखाना, चाहे ना करना पूजा पाठ, ना चाहे ध्यान प्रभु का लगाना, भूखे को भोजन, प्यासे को पानी पिलाना, जो आ
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कहानी
लहरों में दबा सच अलवर की सुबह धीरे-धीरे अपने रंग में उतर रही थी। अरावली की पहाड़ियों के पीछे से सूरज की पहली किरणें निकलकर शहर की पुरान
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एक सवाल - बांझ स्त्री पर कविता
एक सवाल “ बांझ “ किसने बनाया यह शब्द, “भगवान” या भगवान के नाम पर “ इंसान ” किसने ? निश्चित किया - “ कोख “ से एक स्त्री की पहचान, नहीं उठी
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परायी होती है बेटियां
आधी उम्र साथ में चलकर थम जाते है कुछ कदम बढ़ाकर यूं तो अजनबी नहीं थे हम बेटियों से कभी गूँजता था घर आंगन।। कर देते हैं पराया कुछ पल मे
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हादसा और विवाह
बहुत पहले की बात है राम सौगार्थ नाम का एक व्यक्ति मुंबई में रहते थे। पेशे से वे एक कांट्रेक्टर थे। बहुत सारे कंपनियों में उनका कांटेक्
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सेवाभाव
कहानी शीर्षक : सेवाभाव सविता की नजर दीवार घड़ी पर अटकी हैं I 2 बज चुके हैं I अभी तक उदय स्कूल से घर नहीं आया हैं I उसे 15
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गलती एक ही सही पर बार बार गिनी जाती है 🔥
गलती एक ही सही पर बार बार गिनी जाती है अच्छाइयां सौ ही क्यों न हो पर उसकी गिनती एकबार भी नहीं होती...!! धन्यवाद🙏🏻
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ईश्वर
तब तक ये चलता रहे, जब तक इसमें मैं जो मै इस से जुदा हुई, ये कुछ भी ना है
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नौकरी की तलाश
पढ़ते पढ़ते आधी उमर बीत गई फिर भी हुआ नहीं कुछ खास मन में है बस नौकरी की आस अपनी पहचान की तलाश।। बहुत परीक्षाएँ भी दे चुके सफलता फिर भ
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