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સમજાય છે બધુંય અહીં, પણ સમય ગયા પછી, ખૂલે છે પાન-પાન અહીં, પણ સમય ગયા પછી. ​જીવી રહ્યા છીએ અમે અંધારમાં અત્યારે, મળે છે રોશની અહીં, પણ સમ� read more >>
नभ से उतरी सुरनारि हो, या कंचन की प्रतिमा कोई, शरद चंद्र की धवल धार, मृदु स्वप्नों में खोई खोई। मृग-शावक सी चंचल आँखें, कजरारे घेरों में read more >>
"मां" मां तुम ऐसी कैसी हो?? मां तुम जब सुबह उठती हो। तो उलझे बालों को ऐसे बांधती हो जैसे कंघी करने में न जाने कितना वक्त निकल read more >>
जिंदगी के हर पल को मुस्कुराते हुए जियो क्या रखा है रोने में गम के आंसू पीयो कभी तो दिन बदलेंगे इस विचार को मन में रखो किसी से उम्मी read more >>
*टूटते रिश्ते बिखरते सम्बंध* पुराने समय में पत्रों में सबसे पहले *अत्र कुशल तत्रास्तु* लिखा जाता था इसका भावार्थ यह था कि हम यहां कुशल read more >>
फिर नई सीख सी दे जाती है किताब तजुर्बा पुराना रखती है। शरद भूषण मोंगरा read more >>
*भाई: ईश्वर की सौगात* बड़ा भाई बड़ा होता है, जो तेरे साथ हमेशा खड़ा होता है, बस में चाहे कुछ भी ना हो उसके, तेरे लिए वह हमेशा अड़ा होता है� read more >>
" नारी सोंदर्य" बिन साज सिंगार किये ही वह मनभावन तरुनी लगती थी पीताम्बर कभी स्वेताम्बर में मन हरनी हिरनी लगती थी चपल नहीं थी शां� read more >>
अगर उड़ने की तमन्ना हो, तो बैसाखियों का सहारा नहीं लिया करते।। read more >>
कौन सी कश्ती में सवार हूं मैं जाने जिंदगी कहां ले जा रही है दिन प्रतिदिन घटते जा रहे हैं हम उनके प्यार में इंतजार करते जा रहे हैं पत� read more >>
क्यों आखिर ....?? हम झूठी जिंदगी जीते हैं!! जबकि पता है हमें ... हमारे होने या ना होने से * किसी को फर्क नहीं पड़ता ...!! धन्यवाद read more >>
હકીકતની આ દુનિયામાં, કલ્પનાના રંગ પૂરી જોઈએ, ચાલને આજે ફરી, હસીને થોડું જીવી જોઈએ. ​પુસ્તકોમાં તો લખ્યું છે જે વીતી ગયું એ બધું, ચાલ, અ read more >>
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