Rupesh Singh Lostom 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य मैं फूल हूँ 39394 0 Hindi :: हिंदी
मैं फूल हूँ काटों से लिपटा रहता हूँ कही भी कही भी हर मौसम में मिलता हूँ मैं कोमल हूँ और नाजुक भी मैं फूल हूँ मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा में मुझ बिन न अर्पण होता न तर्पण मुझ बिन हर कार्य अधूरा भगवान का निबाला हूँ मैं फूल हूँ मैं दो प्रेमियों का प्रेम प्रपोजल हूँ स्वीकार हूँ और अस्वीकार भी हूँ मैं फूल हूँ लोग मुझ से ही मुझे अलग करते मुझे टुकड़ों में बाट देते हैं मैं खुद भी सवरना चाहता हूँ अपने शरीर से ही लगे रहना चाहता हूँ मैं फूल हूँ