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ग़र मेरा प्यार है तुम्हारे गमों का कारण। मेरे अपनेपन से पहुंचता है तुम्हें असीम दुखः। मेरी ये बेबस आँखे ले आती है तुम्हारे आखों में � read more >>
एक बचपन था, जो खिलौनों से बीत गया...! एक मन हैं, जो अब मौन(एकांत) चाहता हैं...!! read more >>
वो मेरी दौलत ही थी जिसने तुझे मेरे काबिल बनाया वरना, तुझे मेरे प्यार का शौक कहां read more >>
तुम को प्रेम में पत्र, उपहार, और फूल मिलें होंगे...!! मैंने अपना कीमती वक्त दिया हैं तुम्हें....!! अतुल...✍🏻 read more >>
मानों है सावन आया आंखों से आंसू का झड़ना मानों है सावन आया दुःख के घेरे काले बादल तन मन पर ऐसे छाया नहीं उगेगा सुख का सूरज नहीं सवे� read more >>
ऐसे तू सामने आया न कर... तेरे जाने पे आँखे, तुझे देखने को तरसे... ख़ुशी तो बहुत, पर आँखे नम कर जाती है... ये आँखे पूर� read more >>
कविता रघुवीर सिंह पंवार धूप में तपता, धरती का लाल, हाथ में हल, आँखों में सवाल। हर बूँद पसीने की, बनती मोती, खेती करता, सजाता अपनी ओटी। � read more >>
मेरी,..... मेरे नसीब की शिकायतों से तेरा क्या वास्ता ........! तुमने तो हमें ,बहुत पसंद किया था । कभी, हम ही तेरे काबिल नहीं थे ।। read more >>
cancer cancer is a condition in which cells in the body grow abnormally. Everyone has the potential to develop cancer from birth, but it is not contagious like an infection or cold. Certain factors can cause changes in DNA of cells, leading to uncontrolled growth. These factors include chronic irritation, exposure to tobacco, smoke, dust and radi read more >>
यों ,खुल्लेआम जब कभी , मिलन मुनासिब, नहीं था ।। तो क्यों , मिलना मुनासिब समझा ।। फिर,दर्द दिया इतना क्यों .... ? हमें अपने काबिल समझा।। read more >>
किसको अपना समझे? अपने को या पराए को? किसको पराया समझे? पराए को या अपने को? read more >>
किसी से बहुत ही ज्यादा उम्मीद की थी; मगर उसने सिखा दिया कि, उम्मीद किसी से कभी करनी ही नहीं चाहिए। समझी? read more >>
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