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Abhishek Mishra

Abhishek Mishra

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@ abhishek-mishra-1
, Uttar Pradesh

अभिषेक मिश्रा चकिया बलिया (उत्तर प्रदेश) के युवा कवि और लेखक हैं, जिन्होंने हिंदी साहित्य में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने हिंदी में कविताएँ और लेख लिखने की शुरुआत कॉलेज जीवन में की और तब से लगातार अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक चेतना, मानवता और सकारात्मक संदेश फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। अभिषेक की कविताएँ अक्सर सत्य, सेवा, प्रेम और समाज में उजाला फैलाने के विषय पर केंद्रित होती हैं। उनकी रचनाएँ अनेकों प्रतिष्ठित मंच एवं अन्य साहित्यिक प्लेटफ़ॉर्म तथा पुस्तकों में प्रकाशित हो चुकी हैं। अभिषेक लगातार अपने साहित्यिक योगदान के माध्यम से युवा पीढ़ी में सामाजिक जिम्मेदारी, मानवता और नैतिक मूल्यों को जागृत करने का प्रयास कर रहे हैं।

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My Articles

( बाल दिवस विशेष 2025) बाल दिवस आया है, फिर से शोर मचाने को, इस उम्र ने झकझोरा है, कुछ पीछे लौट जाने को। वो दिन जब हम छोटे थे, ख़्वाब बड़े सजात read more >>
मैं उस मिट्टी की बात करूँ, जो हर जन्म की पहली धड़कन है, जो आँसुओं से भीगकर हँसती है, और लहू से रंगकर भी महकती है। वो मिट्टी — जिसने राम क read more >>
गाँव की चौपालों में, पीपल की छाँव तले, मास्टर जी ज्ञान की बूँदें, बच्चों पर बरसाते। टाट-पट्टी पर बैठकर, शब्दों की नदियाँ बहतीं, गुरु के � read more >>
हिंदी है दिल की जुबां, हिंदी है जन-गान। भारत माँ की वाणी है, इसका ऊँचा मान।। माटी की खुशबू लिए, बोले हर इंसान। गंगा-जमुनी संस्कृति की, ह� read more >>
कभी संग बैठते थे चौपाल पे सब यार, हँसी बाँटते थे मिल-जुलकर बार-बार। राम की कथा सुनते थे सब यहाँ, औली में गूँजता था अल्लाह जहाँ। आज क्यो� read more >>
कलम न झुकेगी सत्ता के आगे, न बिकेगी दौलत के साए में। सच लिखना ही उसका व्रत है, वो जलेगी समाज की ज्वालाओं में। शब्द नहीं हैं बाजार का मा� read more >>
माटी बोले, सूरज हँसे, पवन सुने हर राग। इस धरती के आँचल में, छिपा है अनुपम भाग। हर बूँद यहाँ पर अमृत है, हर आँसू में एक गीत। जो झुका तिरं� read more >>
बार-बार चुनाव का शोर, कभी यहाँ, कभी वहाँ मतदाता की कतार, कभी लोकसभा, कभी विधान सभा, कभी पंचायत, कभी नगर-पार, हर बार घोषणा पत्र, हर बार नारा, � read more >>
मंगलमय माँ का पावन पर्व, भक्ति से गूँजे हर एक स्वर। नवदुर्गा के नौ रत्न निराले, करें भक्तों के जीवन उजाले। शैलपुत्री प्रथम जगदम्बा, � read more >>
दीप बनो जो राह दिखाए, जो अंधियारा दूर भगाए। जलो मगर सेवा के लिए, ना कि केवल मेवा लिए। दीप बनो जो सत्य जलाए, झूठ और भय सब मिट जाए। जग में � read more >>
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