राहों में कांटे होंगे ही, पैरों में छाले आएंगे,
मंजिल की धुन में राही, कई बार डगमगाएंगे।
गिरना कोई हार नहीं, ये तो बस इक विराम है,
जो गिर� read more >>
कलम चाहे हज़ार हों, पर बात क्या होगी?
जो शब्द ही न पास हों, तो शुरुआत क्या होगी?
सजी हों अलमारियाँ, पर रूह ही न हो,
तो कागज़ों के साथ फिर, मुला read more >>
पत्थर की मूरत को छप्पन भोग लगाते हो,
सोने के गुंबद पर तुम चांदी चढ़ाते हो।
वो तो जगत का स्वामी है, उसे क्या कमी है?
असली जरूरत तो यहाँ, आँ� read more >>
समय बड़ा अनमोल है, इसे यूँ ही न गँवाओ तुम,
बर्बाद भी करना हो तो, किसी ख़्वाब पे लुटाओ तुम।
सिक्कों में नहीं तौला जाता, दिलों में बसता है � read more >>
मतला:
वक़्त के आईने में मेरा सच नज़र आता है,
जो मैं बनकर चलता हूँ, वही रूप बन जाता है।
हर लम्हा सवाल बनकर रूह से टकराता है,
मेरी खामोशी क� read more >>
दुनिया ने मुझसे पूछा, तूने क्या कमाया है,
मैंने कहा, मेरे दिल ने सुकून पाया है।
सोने की चाह में जब चैन को भुलाया है,
हर रात ने मुझे मेरे � read more >>
जंगल का राजा भी बन जाता है तमाशा यहाँ,
जब अपनी चाल छोड़ दे, दुनिया की भाषा यहाँ।
पिंजरे सोने के हों तब भी, घुटती है हर साँस यहाँ,
आज़ादी � read more >>