काया माटी की, ये तो सब जाने,
पर भीतर छुपा कोई और खजाना।
ना कोई रंग, ना कोई आकृति,
वो शुद्ध चेतना है, अमर ज्योति।
हर जीव में समाया वो परम स read more >>
जोश-ए-परवाज़ हो तो आसमाँ भी छोटा है,
कोई चोटी नहीं अरमानों से ऊँचा शिखर।
वो तलाश-ए-सुकूँ जो दिल में ठहरी है अब,
नहीं सागर से गहरा, है मोह� read more >>