तुम्हें देख कर खिला है मेरे दिल का,
गुलों सा रंग चेहरे पे है, ये क्या है?
तुम ख़ुद ही हो एक पूरी ग़ज़ल,
नज़्म-ओ-सहर तुम्हारी, ये क्या है?
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सपनों से किया प्यार..
रचना -प्रतिभा खडेकार
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,,,,,,,,, सपनों से किया प्यार
,,,,,,,,, अपनों ने दिया है ठुक� read more >>
क्या यह सच है
जो अपने होते हैं....!!
उन्हें ही कुछ भी बोल देना है....!!
अक्सर कुछ लोग दर्द देने के
बाद कहते हैं तुम अपने थें
इसलिए तुम्हें बो� read more >>