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पता नहीं कैसे परखता है मुझे मेरा ईश्वर, परीक्षा भी कठिन लेता है और हारने भी नहीं देता। मैं अक्सर कहता हूँ— "हे प्रभु! इतना बोझ क्यों दि read more >>
कलमकार हूँ लिख दूंगा औकात में रहकर बोला करिए मेरे प्रोफेशन पर जरा तुम सोंच समझकर बोला करिए पैसे का घमंड तुम्हें है गर तो पेशे का घमंड read more >>
हिंदी दिवस : एक दिन का उत्सव या भाषा का वास्तविक संबल? हर वर्ष 14 सितंबर को पूरे देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन इसलिए महत्वपूर् read more >>
तुम्हें देख कर खिला है मेरे दिल का, गुलों सा रंग चेहरे पे है, ये क्या है? ​तुम ख़ुद ही हो एक पूरी ग़ज़ल, नज़्म-ओ-सहर तुम्हारी, ये क्या है? read more >>
इतना आसान नहीं ...!!✍️ रिश्ता तोड़ देना...!!❣️ गर ....…होता..!!💕 तो आज हर कोई अपने ..!🌹 अनचाहे रिश्ते से आजाद होता...!!💖 धन्यवाद read more >>
सपनों से किया प्यार.. रचना -प्रतिभा खडेकार ,,,7517947668 ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,,,, सपनों से किया प्यार ,,,,,,,,, अपनों ने दिया है ठुक� read more >>
गावाच्या शेवटच्या टोकाला एक जुना पिंपळाचा वृक्ष होता – आसपास कुठेच माणसांची वर्दळ नसे, फक्त झाडांची कुजबुज आणि वाऱ्याचा निनाद. त्या read more >>
ज़मीं पर चाँद और चाँदनी सी तू, तेरी हवाओं में बसी है खुशबू। ​ये तेरी ही खुशबू मुझको खींच लाती है, तेरे ही एहसास में मैं बहकी जाती हूंँ। read more >>
दो दिन पहले मैं फेसबुक देख रहा था तो आगे बढ़ते हुए मुझे एक युवा बुरी तरह से सोशल मीडिया पर गंदी गाली अपने परिजनों व रिश्तेदारों को देते read more >>
क्या यह सच है जो अपने होते हैं....!! उन्हें ही कुछ भी बोल देना है....!! अक्सर कुछ लोग दर्द देने के बाद कहते हैं तुम अपने थें इसलिए तुम्हें बो� read more >>
क्या होगा यहां इंसाफ मांग कर जब इंसाफ मिलता ही नहीं बात जब स्त्री की हो तो जुबान होकर भी जुबान जब खुलता ही नहीं गुहार लगाओ या मोमबत्त� read more >>
क्या होगा यहां इंसाफ मांग कर जब इंसाफ मिलता ही नहीं बात जब स्त्री की हो तो जुबान होकर भी जुबान जब खुलता ही नहीं गुहार लगाओ या मोमबत्त� read more >>
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