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कुछ समय निकालो-अक्सर हमने लोगों को कहते हुए सुना है
अक्सर हमने लोगों को कहते हुए सुना है । कि अरे !मैं करना तो बहुत कुछ चाहता था। परंतु मेरे पास समय नहीं था जैसे की कोई वह नया व्यापार, करन�
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जिंदगी भर का जख्म दे दिया तूने-हमने तो कुछ पल की खुशी मांगी थी
जिंदगी भर का जख्म दे दिया तूने हमने तो कुछ पल की खुशी मांगी थी तूने तो कांटा बिछा डाला राहों में मेरे सीने से दिल निकालकर पत्थर का ब�
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अगर मैं तेरी होती-तो कदर ना मेरी होती
अगर मैं तेरी होती तो कदर ना मेरी होती जमाने का है ऐ दस्तूर कड़वा है मगर सच है जरूर तुझको लगती हूं मैं प्यारी क्योंकि मैं हूं चीज पराई
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चाहत भी नहीं अब तो -ये दिल भी लगा बैठे
चाहत भी नहीं अब तो ये दिल भी लगा बैठे तुझे अपना बना बैठे एक सपना सजा बैठे देखा जब ख़्वाब तेरा रातों को गवां बैठे तुझे अपना बना बैठे ए
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चाहत भी नहीं अब तो -ये दिल भी लगा बैठे
चाहत भी नहीं अब तो ये दिल भी लगा बैठे तुझे अपना बना बैठे एक सपना सजा बैठे देखा जब ख़्वाब तेरा रातों को गवां बैठे तुझे अपना बना बैठे ए
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करते नहीं विचार जो-करते कुछ भी काम
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" करते नहीं विचार जो,करते कुछ भी काम। आये जब परिणाम तो,लगता उसे लगाम।। करते नहीं विचार जो,औ
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छठ माई की शाम पर-सजा हुआ है घाट
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" छठ माई की शाम पर,सजा हुआ है घाट। पूजा पूजा मय हुआ,अनुपम है नव ठाट।। छठ माई की शाम है,आज सुह�
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उजला तन किस काम का-काला जब हो सोच
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" उजला तन किस काम का,काला जब हो सोच। ऐसे जन सब ही यहाँ,करते रहते नोच।। उजला तन किस काम का,जिसक
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करते नहीं विचार जो-उसे बुद्धि है भ्रष्ट
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" करते नहीं विचार जो,उसे बुद्धि है भ्रष्ट। उल्टे सीधे काम से,करे प्रगति को नष्ट। और गँवा�
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करते नहीं विचार जो-रहे सदा बेरंग
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" करते नहीं विचार जो,करते कुछ भी काम। आये जब परिणाम तो,लगता उसे लगाम।। करते नहीं विचार जो,औ
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क्या कहूं आज मैं आप से- डरता मैं हूं बहुत पाप से
क्या कहूं आज मैं आप से। डरता मैं हूं बहुत पाप से। मैं प्यार का एक मस्त राही- डरूं नहीं कद की नाप से । (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिं�
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मंज़ूरी-तुम्हारी मुस्कुराहट में तुम्हारी मजबूरी नज़र आती है
"मंज़ूरी" "हमें तुम में तुम्हारी मजबूरी नज़र आती है,तुम्हारी मुस्कुराहट में तुम्हारी मजबूरी नज़र आती है,जब भी तुम्हारे ज़िस्म को छूना
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