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मध्यम और गरीब अब-हैं अति अति लाचार दिन दिन बढ़ता जा रहा महँगाई की मार
(दोहा छंद) मध्यम और गरीब अब, हैं अति अति लाचार। दिन दिन बढ़ता जा रहा,महँगाई की मार।। दिन दिन बढ़ता जा रहा,नशा युवा में आज। बेकारी से त्�
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नर नारी खाए दवा-सुख का मिले न भोग दिन दिन बढ़ता जा रहा भीषण मय अब रोग
(दोहा छंद) नर नारी खाए दवा,सुख का मिले न भोग। दिन दिन बढ़ता जा रहा,भीषण मय अब रोग।। दिन दिन बढ़ता जा रहा,महँगाई की मार। मध्यम और गरीब अब
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दिन दिन बढ़ता जा रहा-लोगों में अब लोभ लेना चाहे पर माल को जो है मनु पर चोभ
(दोहा छंद) दिन दिन बढ़ता जा रहा, लोगों में अब लोभ। लेना चाहे पर माल को,जो है मनु पर चोभ।। दिन दिन बढ़ता जा रहा,दुनियां में अपराध। जैसे ज�
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मौका रहे तलाश में-दुर्जन हैं विष घोल पानी पानी हो रहा मानवता का मोल
(दोहा छंद) मौका रहे तलाश में,दुर्जन हैं विष घोल। पानी पानी हो रहा,मानवता का मोल।। पानी पानी हो रहा,रहे निर्लोभ शांत। लोभी को बरसात मे
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अच्छा तथा खराब भी-खुशियों में कचनार पानी पानी हो रहा शहर गांव सब यार
(दोहा छंद) अच्छा तथा खराब भी, खुशियों में कचनार। पानी पानी हो रहा,शहर गांव सब यार।। पानी पानी हो रहा,मानवता का मोल। मौका रहे तलाश में,�
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अपना तुम्हें हम बना ना सके-हाथों को स्याही ने रंग सा दिया
तुम कही बुला न सके हम कहीं आ ना सके भावनाओं से भरी भीड़ थी जिसको स्वयं से मिटा ना सके। कदम लेखनी बनकर चलते गए आशा और इच्छा पनपते गये। �
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पानी पानी हो रहा- मौसम है बरसात सावन भी अब जोर में हुई सुहानी रात
(दोहा छंद) पानी पानी हो रहा, मौसम है बरसात। सावन भी अब जोर में, हुई सुहानी रात।। पानी पानी हो रहा,भले लोग जो आज। निर्लज खाया लाज को,करता
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जब से तुमको देखा-जैसे हो जीवन रेखा
जब से तुमको देखा जैसे हो जीवन रेखा कितने और भुलावे लेकर पहुंच गए हैं शशिरेखा। करुण कर्ण कि मूक परीक्षा देने से क्या होगा मेरे तुममें
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मानव तन में-मोक्ष पद पंकज पाना है माया तोड़ निकल जाना है
"मानव तन में क्यों रोना है, चौरासी काट कर आया है",,, "माया तोड़ निकल जाना है, मोक्ष पद पंकज पाना है"....!!!! -मोती
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जिंदगी मुझको रुलाया ना कर-मेरे गम के करीब आया ना कर
जिंदगी मुझको रुलाया ना कर मेरे गम के करीब आया ना कर। अंधेरा चीर गया है मेरे दिल को जले चिरागों को बुझाया ना कर। मुफलिसी मे जो तुम्हे�
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संसार सागर में-गुरु की पतवार साहिल को कश्ती माया की धारा में बहती यह कश्ती
"संसार सागर में देह एक कश्ती, माया की धारा में बहती यह कश्ती",,, "साहिल को खेवनहार बिन कश्ती, गुरु की पतवार साहिल को कश्ती"....!!!! -मोती
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जीवन में उदासी-कोई कारण नहीं उठो बढ़ो ख़ुदा मेहरबान है
"उदासी कारण-भला है क्या, अकारण-ज़िंदगी मिला क्या",,, "जीवन-ख़ुदा का इनायत है, उठो बढ़ो-ख़ुदा मेहरबान है"....!!!! -मोती
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