आज, कहे तों क्या .....
आज कहे तो ....? हो, आज...
ऐसे गिरी आसमाँ से
नूर सी बिजली ,हाय गई चीर कल्लेजा ।
तड़ती रात रंगीली ।हाय
आज ,कहे......
नजर मे सदा read more >>
(गजल छंद01)
चलते चलते बोझिल होने पर ठहराव ही है जरूरी,
रहते रहते एक ही छत के नीचे बदलाव ही है जरूरी।
संसार में गम बहुत हैं इसलिए प्यार नि� read more >>
(मुक्तक छंद)
01
जिन्दगी को मैंने इस कदर देखा जिन्दगी मुझ में डूब गई।
मेरी हर चाहत को पूरा करने के लिए मजबूर हो गई।
अब आलम यह है कि सारी दु� read more >>
एक गर्मी का दिन था, धूप तेज़ चमक रही थी। जन्मदिन के इस खास मौके पर, राहुल ने अपने घर में एक पार्टी आयोजित की थी। वे नए रिश्तेदारों को भी आम� read more >>
प्रेम की भाषा सुन, सजनी रे,
बिंदिया चमक रही है आँखों में।
उठो, बसो नींद से हरियाली के पल,
संग गीतों के लहराते हैं तन में।।
सावन के बादल, � read more >>