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मां का क्रोध है जग में सबसे न्यारा कुछ है अलबेला तो कुछ है नखराला मां है प्रेम का अंचल जिसने नो माह कांटे दुख कष्ट में क्या हम पर क्र read more >>
तेरे इश्क में हम पागल हैं, पी लिया तेरे नाम का जाम, इस जग से अब बेगाने हैं। read more >>
(शायरी) प्रार्थना भी बेकार साबित हो जाते हैं, कोशिश का दामन थामे बढते जा रहा हूं। मायूसी का आगमन जोर_शोर से होता है, कुछ शुद्ध आत्माओं � read more >>
ना मैं मीरा ना मैं राधा, फिर भी हूं तेरी दीवानी, इतना सुन्दर रुप हैं तेरा, मैं देखूं बार बार बिहारी। read more >>
(शायरी) कभी अपनों से तो कभी परायों से अनबन है, ऐसे हालात में लहू जिगर का पी रहा हूं। सोचता हूं जज़्बात सारे सकार हो ही जाए, परन्तु घात_प� read more >>
(शायरी) पग_पग पर इम्तिहान की लौ से गुजरना है, फिर भी मुस्कुराते हुए सबसे रूबरू हो रहा हूं। एतिबार कर के भी छलने वाले मिल जाते हैं, तब से read more >>
धर्म की व्याख्या करना कोई आसान काम नही है। जियो और जीने दो , स्वयं सुख से रहो और दूसरो को सुख से रहने दो बस यही समझने का आसान तरीका है। स� read more >>
आ लौट चली आ घर अपने है कद्र नही जिस नारी को,पति के सारे अरमानों की वह हो ना सकती है नारी,बस सिवा मूर्ति अपमानों की हाथों में थामा हाथ सम read more >>
1. काली घटा का घमंड देखा रंग रूप एक जैसा आसमान को छूने चली है मकड़ी टूटा जाल बिखर गई कोशिश. 2. झूंड बना कर खड़ा इंसान झांक झांक कर देखता बाद� read more >>
बहकी हवाएं, सुलगा है मन, आगे क्या होगा माजरा। सितम की घड़ी है, या भरम है रे! बावरा।। मुहब्बत को कैसे कह दे हम, लगता है हमको खुद से डर। � read more >>
ऐसा क्यों मेरे साथ हुई, एक वहीं बात हुई। बिछड़े है तुमसे ये यार कैसे, कि फिर ना मुलाकात हुई। बिन सावन के आँखों से बरसात हुई, दिन के उज read more >>
किसी बुनकर के चरखे की तरह, चरखा विचारों का घूमता है, बुनता रहता वो रात दिन ये मन रूपी धागा। धागा, जो धागा-धागा करके, एक पर्दा बन जाता ह� read more >>
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