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तुमसे दूर हो कुछ भाता नहीं है। झिलमिल दिए बुझने लगे हैं मन में दीया जगमगाता नहीं है। कैसे मधुप ने नई राह चुन ली मुझमें धैर्य अब समाता � read more >>
एकतरफा प्यार था मेरा ना कभी बता पाया ना कभी जता पाया। और न बो सक्स मेरा हो पाया। read more >>
कविता- हे वेदों के अकाल पुरुष!तुम कौन हो? पद- श्रीहरि भक्ति पद। रस- भक्ति रस छन्द- मुक्तक (मुक्त छन्द) कविता- (१) तुम कैलाशी! तुम अविनाशी! read more >>
हार हृदय की वही कहानी तुम ही तो कह जाते हो। साथ साथ मेरे आकर मुझको ही छल जाते हो। वही वेदना फिर उठ कर जीवन राग सुनाती है दिखा छलावा रूप read more >>
हजारों दीप जल जाए तुम बस मुस्कुराना। निगाहें मेरी थम जाए तुम बस मुस्कुराना। दर्द जब भी बढ़े कि सीना चीर जाए हौसला उससे मिलने का कभी read more >>
तू धोखा है ये सबने कहा पर मैने ये सब इनकार किया। ये दर्द मुझे मिलना ही था मैने बेवफा से प्यार किया। केशव सिंह 📝 read more >>
मेरे पैर में फटे व्यार किस्से मै सुनाऊ ना घर सुने ना सरकार सुने क्या घुट घुट के मर जाऊ इस महगई की दौड में ना पेट भरे ,ना खुश मेरे परिव� read more >>
ज़रा सा दिल की बात कह देता हूँ, शायरी के रूप में यहां लिख देता हूँ। जब दर्द का सामना करना पड़े, ख़ुद को हंसते हुए बयाँ कर देता हूँ। इश्� read more >>
दुनिया में जिसकी जितनी समझ होगी वो उतना ही दूसरो को समझ पाएगा आप खुद के बारे में लोगो को समझा कर अपना वक़्त जाया ना करे जनाब - और सुनो सूरज read more >>
मोहब्बत करके देख लिया हमने प्यार कितना भी सच्चा क्यों ना हो। एक दिन साथ छोड़ ही देती है। read more >>
नाहीं ज़िंदगी पतंग है कि कट जाएंगे। नाहीं राह अनजान है कि गुम जाएंगे।। जब साईं का ठिकाना ही हर घट में है। तो जनाब मंज़िल भी तन में ही � read more >>
एक शिलशिले की उम्मीद थी जिनसे बो फासले बनाते गए। हम तो पास आने की कोशिश में थे न जाने बो क्यों दूरियां बनाते गए। केशव सिंह 📝 read more >>
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