(मुक्तक छंद,)
भूल पर भूल वे करते आ रहें हैं ख़ुद को धोखा दे रहें हैं।
उसे अपनों में ही आन आड़े आ गया है उलझ रहें हैं।
पश्चाताप की आग में व� read more >>
काश हकीकत में अगर ये दिल खिलौना होता।
तो कोई भी सचमुच में कभी भी तोड़ देता।
पर दिल _दिल होता है कोई खिलौना तो नहीं:_
अगर सिर्फ़ ऐसा ही रह� read more >>
हम अपने आप को कभी भी कमजोर साबित होना पसंद नहीं करते हैं कभी भी जब कभी हम असहाय और अशक्त होते हैं तो हम दुखी हो जाते हैं कोई भी अपनी शक्ति read more >>