मुझे आज भी याद है कि जब में कक्षा १ या २ में रही हूंगी और मै बिल्कुल ऐसी ही थी जैसे सब बच्चे बचपन में होते है मनमौजी, अपनी ही धुन में।
एक द� read more >>
हवाएं भी बेरुखी सी थी और मौसम भी नाराज था
लग रहा था कि जैसे ये
मेरी तबाही का साज था
पर एक बादल घुमड़ कर ऐसा बरसा मुझ पर
कि मैने जाना ये त� read more >>