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पहले जैसे अब कहां- प्यारे प्यारे लोग लगे हुए सब होड़ में
(दोहा छंद) पहले जैसे अब कहां, प्यारे प्यारे लोग। लगे हुए सब होड़ में,और बढ़े नव रोग।। पहले जैसे अब कहां, उमस भड़ी है बात। चक्कर काटे खूब
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दिल ना दुखायें किसी का-बड़ा दर्द होता हैं
दिल ना दुखायें किसी का, बड़ा दर्द होता हैं, होशला देओ किसी को, अच्छा लगता हैं।
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दिल ना दुखायें किसी का-बड़ा दर्द होता हैं
दिल ना दुखायें किसी का, बड़ा दर्द होता हैं, होशला देओ किसी को, अच्छा लगता हैं।
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मिलावट का आज जमाना है-हर कुछ में मिलावट है
(मुक्तक छंद) मिलावट का आज जमाना है हर कुछ में मिलावट है। फिर भी गम नहीं है लोगों में जग में बहु सजावट है। जीने की इस तरीके को मेरा हृदय स
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घर से निकल आए- घर के लिए पैसे कमाने
(मुक्तक छंद) घर से निकल आए घर के लिए पैसे कमाने। कई रूप देखे कई सवाल यहां के जमाने। परिश्रम रंग लाया पाया मैंने यहां सबकुछ _ हरेक रत्नो�
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उदासियों को पनपने ही न दें-कर देगी मजा किरकिरा
(मुक्तक छंद) उदासियों को पनपने ही न दें कर देगी मजा किरकिरा। व्यस्त रहने से बना रहेगा तन में उर्जा का जखीरा। जीवन जंग है लड़ना पड़ता य�
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हम भारत के लोग-विभिन्नताओं में भी एक हैं
(मुक्तक छंद) हम भारत के लोग विभिन्नताओं में भी एक हैं। नेक हृदयवालों के लिए दिल से हम भी नेक हैं। भयानक मौत हूं दुश्मनों के लिए सभी हाल �
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भरे खजाना खूब ही-बड़ा करे आकार
(मुक्तक छंद) पहले जैसे अब कहां,पानी हवा जुगार। मिले मिलावट में सभी,छीने पर अधिकार। चौधरी बनकर तब चले,और दिखाए रोब_ भरे खजाना खूब ही,बड़�
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देखें मंजिल को सदा-करें सुखद तब आज
पहले जैसे अब कहां,छलियों का है राज। छलते कोई भी यहां,बनते फिरते बाज। ऐसे में मुश्किल बड़ा,रहना पड़ता तेज_ देखें मंजिल को सदा,करें सुखद
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चैन रैन आराम-पहले जैसे अब कहां
(मुक्तक छंद) पहले जैसे अब कहां,चैन रैन आराम। चिन्ता सोते जागते,फिर भी हो बदनाम। मगर बुरा तो मत लगे,रहिए तो भी खुश_ यही कला तो खास है,करते
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चक्कर काटे खूब तो-खुशी भरी हो रात
(मुक्तक छंद) चक्कर काटे खूब तो,खुशी भरी हो रात। बादल काजल है लगे,पानी है अभिजात। सावन करे कमाल नित,आए मन में प्रेम_ भोली सूरत सामने,करती
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पहले जैसे अब कहां-प्यारे प्यारे लोग
(मुक्तक छंद) पहले जैसे अब कहां, प्यारे प्यारे लोग। लगे हुए सब होड़ में,और बढ़े नव रोग। संकट में ही सब दिखे,उमस भड़ी है बात_ अपना अपना सब क
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