(दोहा छंद)
सभी बदलाव में लगे, आ जाए अब होश।
आया समय चुनाव का, लोगों में भी जोश।।
आया समय चुनाव का,उत्सव जैसा आज।
मुश्किल अब तो दौड़ है,घृ� read more >>
कभी कभी जीवन में ऐसा पल भी आता है कि मुझे यह लगता है कि मेरे लिए सभी रास्ते बंद हो चुके हैं और अब मैं कुछ भी जीवन में नहीं कर पाऊंगी मैं नि� read more >>
(दोहा छंद)
आया समय चुनाव का, पार्टी सब में होड़।
अपने अपने ढंग से, बनते सब बेजोड़।।
आया समय चुनाव का, करते सभी प्रचार।
खूब सभाएं हो रहे, अ� read more >>
सजा के मंडी -
गद्दी पे बैठकर ;
ढोंग रचा रहा पाखंडी ,
ले के सब सब से वोट -
आघात किया दे के -
सब को चोट ;
तू भूल गया -
अपना परिचय ,
जो भी है तू -
है � read more >>
(दोहा छंद)
पर करना है कर्म भी, है यह बात अतीक।
राम भरोसे चल रहा, यह तो है बहु ठीक।।
राम भरोसे चल रहा, लोगों के विश्वास।
धोखे वाले हर कहीं, � read more >>
बेटी की जिंदगी,
एक उलझन हैं,
ना ससुराल हैं उसका,
ना मायका,
दोनों तरफ से पराई हैं,
मन को मार के हैं जीती,
कैसी रीत पुरानी है,
समझते उसे बोझ, read more >>