जीवन की इस आपाधापी में बिखरती जा रही श्वांसो को समेटने की कश्मकश में भरभराते कंठ से गुनगुनाता एक लड़का, जिसे लगता है कि जिस दिन पूरी तरह से कवि हो जाएगा, मर जाएगा वो और जी उठेगी उसकी मनुष्यता!
आज सुबह मैं अपने पापा के साथ बाज़ार से लौट कर आ रहा था कि तभी एक आदमी ने पास में आकर बाइक रोकी और पापा के पैरों पर गिर पड़ा-
-दद्दा राम राम।
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( अपने बचपन का अधिकांश भाग मैंने यह सोच कर निकाला कि भगवान ने मुझे बिना कुछ दिए ही भेज दिया । विद्यालय में सुनता था "तुम्हारे पास दिमा� read more >>
विद्यालय, वो स्थान जहाँ एक अबोध बालक जाता है , और तेजस्वी, बद्धिमान बन कर लौटता है। जीवन के मर्म को समझता है। लेकिन ये बातें गुरुकुल तक ह� read more >>