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आकाश अगम

आकाश अगम

आकाश अगम

@ aakash-agm
, Uttar Pradesh

जीवन की इस आपाधापी में बिखरती जा रही श्वांसो को समेटने की कश्मकश में भरभराते कंठ से गुनगुनाता एक लड़का, जिसे लगता है कि जिस दिन पूरी तरह से कवि हो जाएगा, मर जाएगा वो और जी उठेगी उसकी मनुष्यता!

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My Articles

अभी जाना है कितनी दूर। अभी तो छोड़ेंगे घर द्वार बने फुटपाथों पर परिवार करें संतुष्ट हृदय को हाय दूर से ही रोटियाँ निहार कई सारी हो जाय read more >>
जिंदा हूँ , तब तक छोड़ूँ मैं अपने कर्म की निशानी तन की भले चली जाए पर मन की जीवित रहे जवानी।। बाहों में इतना तो बल हो अंधे को कंधा मैं read more >>
हमें सुलाये सूखे में ख़ुद गीले में सो जाती है मेरे पालन में वो नारी कितने कष्ट उठाती है मेरा होय अनिष्ट कल्पना करते ही घबराती है ईश्वर � read more >>
मैं किसी रोज़ हार जाता हूँ बैठ कर गीत गुनगुनाता हूँ।। कल मेरे पास उसका फ़ोन आया ये मैं बातें फ़क़त बनाता हूँ।। लोग कहते हैं चुप रहो बेटा read more >>
सही अंदाज़ में जीवन मुझे जीना सिखाती है भटक जाऊँ अगर राहें तो राहें भी दिखाती है कभी इज़हार ना करता किसी के सामने ग़म का मैं चुप रहता हूँ � read more >>
मैं मिट्टी से बना चूल्हा खड़ा निस्तब्ध , कोना मिल गया घर में यहीं पर कर रहा अपनी गुज़र मैं धूल माटी के कणों से हूँ बना किसी ममतामयी माँ न� read more >>
आज सुबह मैं अपने पापा के साथ बाज़ार से लौट कर आ रहा था कि तभी एक आदमी ने पास में आकर बाइक रोकी और पापा के पैरों पर गिर पड़ा- -दद्दा राम राम। -� read more >>
( अपने बचपन का अधिकांश भाग मैंने यह सोच कर निकाला कि भगवान ने मुझे बिना कुछ दिए ही भेज दिया । विद्यालय में सुनता था "तुम्हारे पास दिमा� read more >>
विद्यालय, वो स्थान जहाँ एक अबोध बालक जाता है , और तेजस्वी, बद्धिमान बन कर लौटता है। जीवन के मर्म को समझता है। लेकिन ये बातें गुरुकुल तक ह� read more >>
दर्द की गाड़ी में ख़ुद को उम्र भर जोते रहे ज़िन्दगी भर जिसमें भर कर ज़िन्दगी ढ़ोते रहे।। उस ख़ुदा ने छीन बिस्तर को लिया कुछ सोच कर हम बड़े � read more >>
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