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आकाश अगम

आकाश अगम

आकाश अगम

@ aakash-agm
, Uttar Pradesh

जीवन की इस आपाधापी में बिखरती जा रही श्वांसो को समेटने की कश्मकश में भरभराते कंठ से गुनगुनाता एक लड़का, जिसे लगता है कि जिस दिन पूरी तरह से कवि हो जाएगा, मर जाएगा वो और जी उठेगी उसकी मनुष्यता!

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My Articles

मुझे चद्दर ओढ़ाने को तुम आओ खुली छत पर ठिठुरना चाहता हूँ।। बहुत कर लीं हैं बातें बैठ पर अब तुम्हें बाहों में भरना चाहता हूँ।। करो तु read more >>
कोई नहीं है कितनी बार कहा मेरे दिल में कोई नहीं है मग़र तुम हो कि मानते ही नहीं हाँ रोती हूँ , अकेले रहती हूँ, चुप रहती हूँ पर इसका मतल read more >>
आज दिन में धूप थी कुछ तेज ज़्यादा क्यों ? कदाचित... धूप के ये सूक्ष्म कण मानों पसीने के कणों से मिल बने कुछ खेत में, कुछ कारखानों में तथा � read more >>
दुनिया तो वैसे भी छुटी दिल से निकालो मत अभी ज़िंदा हूँ मुझपर रोज़ आकर फूल डालो मत अभी।। मैं मर गया तो ठीक है इतना रहम तो तुम करो मेरी चित� read more >>
कुछ भाव सिर्फ़ देकर दिल जीत ले तू मेरा फिर अर्थ धन भला क्यों है सामने बिखेरा।। जो भक्ति दिल से करते , झोली में पुण्य भरते दिल से लगा लूँ � read more >>
ये बातें और रो रो कर नयन से जल बहाया है स्वयं गिर गिर के लोगों को मग़र हमने हँसाया है।। ये रस्ता जा रहा किस ओर हमने पूँछ कर देखा गए कर पा read more >>
रात को अकेले में ये विचार करता हूँ क्या मैं आज बचपन के उन ही बंदरों सा हूँ।। रोज़ खेलते, कूदते और साथ पिटते थे दूध से बनी रबड़ी पे दो ह� read more >>
मुन्तशिर होकर जुड़ा हूँ छूट टुकड़े कुछ गए बस उन्हीं के बिन अधूरा ढूँढ़ लाओ दोस्तो।। ये मता'-ए-ग़म न जन्नत में नशीब हो पायगा इसलिए जब भी मिल read more >>
मैं चमकती धार युक्त तलवार हूँ प्यासी हूँ लहू की जैसा कहा करते सभी मैं नहीं हूँ देखती अपना पराया उच्च है या निम्न मेरी बला से घाव देती read more >>
मैं पेंट को साधे हुए इक बेल्ट हूँ मेरी वज़ह से है रुका ये पेंट मेरी वज़ह से व्यक्ति कोई पहन पाता है कोई भी पेंट टूट जाऊँ मैं अगर , गिर जाय� read more >>
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