जीवन की इस आपाधापी में बिखरती जा रही श्वांसो को समेटने की कश्मकश में भरभराते कंठ से गुनगुनाता एक लड़का, जिसे लगता है कि जिस दिन पूरी तरह से कवि हो जाएगा, मर जाएगा वो और जी उठेगी उसकी मनुष्यता!
( ग़लती चाहे किसी की भी हो, लेकिन अधिकतर समाज के व्यंग्य बाण एक लड़की को ही झेलने पड़ते हैं। एक लड़की के हृदय की कुछ बातों पर प्रकाश डालने की � read more >>