जन्मा था सूर्य की छाया से,
पर छोड़ा गया समाज की माया से।
माँ ने आँचल का दूध न पिलाया,
पर राधा ने प्यार का समंदर बहाया।
हर कोई कहे — "सूतप� read more >>
जब जीवन भाग-दौड़ से थक जाता है,
मन भ्रम और चिंता में उलझ जाता है,
तब कृष्ण की वाणी फिर याद दिलाती है—
"कर्तव्य करो, बस कर्म निभाते जाओ।"
न read more >>
अंधेरों में जब लोभ पनपता है,
जब रिश्वत का खेल जम जाता है,
तब न्याय की आवाज़ बनकर,
ACB का दीपक जल जाता है।
जब झूठ और धोखे की दीवारें,
ये साह� read more >>