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Anilkumar Rathwa (Sameer)

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My Articles

आज का युवा भटक गया है, दिखावे की भीड़ में उलझ गया है। सोशल मीडिया की नकली चमक, सच्चे रिश्तों को कर रही ध्वस्त। न उसे धर्म का असली ज्ञान read more >>
आबाद चाहे शहर रखिए, मगर गाँव में भी घर रखिए, ख़ानदान की है वो मिट्टी, ज़रा उसकी भी ख़बर रखिए। चमकते शीशे की इमारत, ऊँची-ऊँची इमारतें, पर read more >>
गोकुल की गलियों में जब, नन्हा श्याम माखन चुराता था। यशोदा की उँगली पकड़, हर ओर हँसी के दीप जलाता था। कभी झूठ-मूठ रूठ जाता, कभी गले लग र� read more >>
कर्म बछड़े जैसा होता है, सच की राहें खोज ही लेता है। लाखों गायों की भीड़ भरी हो, माँ को पहचान ही लेता है। नेकी का बीज जो तुम बोओगे, खुशि� read more >>
तुम्हारी सोच ही तुम्हारी ताकत है, अंधेरों में भी जो रौशनी की राहत है। गिरते हुए कदमों को थाम लेती है, बुझते सपनों में भी चिंगारी जगा दे read more >>
चाँदनी रात में जब तन्हाई घेर लेती है, दिल की धड़कनें भी सिसकियों में बदल जाती हैं। हर मुस्कान के पीछे छुपी होती है लकीरें दर्द की, और ह� read more >>
हर मोहरे की अपनी पहचान, जैसे जीवन में हर इंसान। प्यादा भी यदि मंज़िल पाए, तो रानी बन शक्ति दिखाए। चलते समय सोचो हर बार, जल्दबाज़ी कर द� read more >>
अंधेरी रात के बाद सुबह तय है, कठिनाइयाँ हमें मज़बूत बनाने आती हैं। हर आँधी बस राह दिखाने आती है, जो गिरते हैं, वही उठकर इतिहास रचते हैं� read more >>
पढ़ो, आगे बढ़ो, मंज़िल खुद बुलाएँगी। मेहनत की सीढ़ियों पर, कामयाबी मुस्कुराएँगी। ज्ञान का दीप जलाओ साथी, अज्ञान के अंधियारे मिटाओ। read more >>
लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे, ये सोच-सोचकर ही हम रुक जाते हैं। मन के सपनों को आधा छोड़, दूसरों की परछाइयों में सिमट जाते हैं। कोई क� read more >>
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