आज का युग बदला है, सोच नई हो गई,
पर मेहनत की राह अभी भी वही पुरानी है भाई।
सपने तो सब देखते हैं आसमान जितने ऊँचे,
पर बिना पसीना बहाए मिलते read more >>
(Verse 1 – Soft)
चल पड़े हैं रास्ते फिर से पुकारते,
टूटे सपने भी आज साथ चल पड़े।
धूप है तो क्या हुआ, छाँव बन के तू बढ़,
हार के भी जीता है, जो खुद से क read more >>