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Anilkumar Rathwa (Sameer)

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My Articles

हम सब यात्री हैं एक ही राह के, नाम अलग हैं, मंज़िल एक, कोई तेज़ चलता, कोई रुकता है, पर समय सबका साथी एक। कोई सिखाता, कोई सीखता है, कभी जीवन read more >>
आज तिरंगा सिर्फ लहराया नहीं, आज उसने हमसे वादा लिया है— कि हम अपने सपनों से बड़ा, अपने देश के लिए बनेंगे। ये गणतंत्र कोई तोहफ़ा नहीं, � read more >>
मैं इंसान हूँ, कोई ख़बर नहीं, जो रोज़ बहे और चैनल बने। मेरी ख़ामोशी की चीख़ें भी, भीड़ में जाकर पोस्टर बने। मैं रोटी नहीं, मैं सपना हूँ, read more >>
मतला: जिस दिन सफ़र का आख़िरी मोड़ आएगा, वो क़दम मेरा ही होगा। आज की धड़कनों को आज़ाद रहने दो, ये जीवन मेरी रूह का सपना होगा। शेर 1: भीड़ read more >>
पिता का हाथ कंधे पर हो, तो हालात डराया नहीं करते। आँखों में अगर उनका भरोसा हो, तो तूफ़ान रास्ता बदल लिया करते। दुनिया झुकाने आए तो आने read more >>
मिट्टी का चूल्हा कहता है— बेटा, रोज़ जलना पड़ेगा, तभी घर में उजाला आएगा। रोटी बोलती है— पहले खुद पकना सीख, फिर दुनिया को भूख मिटाने क read more >>
“सुबह तो रोज़ होती है… सूरज हर दिन उगता है… पर सवाल ये नहीं कि दिन कब निकला— सवाल ये है कि इंसान कब जागा? भीड़ में चलना आसान है, पर खुद read more >>
ज़िंदगी कुछ भी दोहराएगी नहीं, जो हाथ से फिसल गया, वो आएगा नहीं। जो आज थक कर बैठ गए राह में, कल मंज़िल भी उनका इंतज़ार करेगी नहीं। हर दि� read more >>
जब साँसें भी बोझ लगें, और हर कदम सज़ा लगें, तब समझ लेना— तू वहीं खड़ा है जहाँ से इतिहास बनता है। मंज़िल थकती नहीं, थकता सिर्फ़ हौसला ह� read more >>
कड़वे समय में भी अगर बोली में शहद घुल जाए, तो टूटे दिलों के शहर में उम्मीद का घर बन जाए। सबके हिस्से का सूरज है, सबकी अपनी-अपनी छाया, जो read more >>
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