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Rupesh Singh Lostom

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My Articles

जो सुकून दे बेफिक्र हैं इस लिए दर्पण सा वेहबार रखते हैं फ़िक्र वो करे जो चेहरे दो चार रखते हैं! जो सुकून दे मन को वो काम करते हैं डरे � read more >>
तू होती तो कुछ बात होती नज़रों से नज़रों की मुलाकात होती रूह से रूह मिलती हमारी मोहब्बत साकार होती तू होती तो हमारी चर्चा सरेआम होती read more >>
आँशुओं को बहने दिया जो दिल में बात थी वो निर्दोष अशुओ ने कह दिया बड़ी मुद्द्त से चाहत थी कि उसे पा सकूँ अपने हाल जख्म दिखा सकूँ लेकि read more >>
अम्बर वरसे नैना तरसे बून्द बून्द पानी को प्यासा मनवा तरसे मुठी भर भूख को अंजुरी भर जल को अतृप्त अखियाँ तरसे ठोप ठोप नीर बहे अधर मे� read more >>
थोड़ा थोडा रोज़ जिंदगी पिघल रहा जैसे साम रोज़ सूरज ढल रहा बून्द बून्द पानी को जैसे आशमा तरस रहा बस उसी तरह जिंदगी जिंदगी से बिछड़ रहा � read more >>
तू झूठी तेरी बातें झूठी झूठ के तू अम्बार हैं प्रेम झूठा तेरा दिल भी झूठा झूठ के तू भंडार हैं वादे झूठी रातें झूठी झूठ तेरी हर बात हैं read more >>
लिफाफे में बंद प्रेम सरे आम हो गया मन के पीड़ा तन के कष्ट पल भर में उजागर होता था चिठ्ठी नहीं लिखना पड़ता व्हाट्सअप से काम चलता हैं कु� read more >>
सपने ख़ाब सब टूट गया तू जब से रूठ गया न मन मानता न ही दिल तू मुझ से दूर गया तन को पीड़ित यौवन घायल तू सिषक्ता जख्मी छोड़ गया सुना कर गया � read more >>
हे घट घट वाशी कृष्ण अविनाशी गोखुल के चित चोर गोपियों संग रास रशैया यशोदा के नन्दलाल देवकी नंदन वासुदेव कंस के तरण हार मीरा के मोह� read more >>
ये वक्त ठहर जा दो घडी मैं साथ में चलने बाला हूँ तू क्यों जल्दी में रहता हैं मेरा काम थोड़ा अभी बाकि हैं कुछ सांस् बचे खत्म कर लु फिर ते read more >>
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