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Rupesh Singh Lostom

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My Articles

निश्चय कर त्रिशूल उठा वार कर संधार कर अंगारों सा जल रहा ज्वला बन धधक रहा अज्ञानी अनुशंधान से जोत जला सोच जगा निश्चय कर के चलना होग� read more >>
रूप निहारु रंग तिहारो छुप छुप पाउ प्रेम तुम्हरो! सूरत तेरी ममता मूर्तियां मैं हारू पर जित तिहारो!! न मन में द्वेष न भीतर विरोध बस हृ read more >>
समय से आगे भागना हैं अभी और जागना हैं ! दौड़ के बादल छू लेना हैं अभी एक और आशमा बनाना हैं !! तारों की दुनिया में छा जाना हैं अभी चाँद पे � read more >>
बदल रहा आशमा के रंग भी थोड़ा थोड़ा जैसे लिख रहा अम्बर नाम अदना अदना ! कौन हैं जो स्वर्गलोक में बना रहा रास्ता परिंदो के घर जो उजाड़ रहा थ� read more >>
बे खबर मगरूर सितमगर जालिम निर्दई सनम रोज थोड़ा थोड़ा इश्क़ में कतरा कतरा नहाया कर ! अपने बेजान जिस्म को चुपके से भिगोया कर फिर इश्क़ क� read more >>
घाब भी अपना दा ओ भी अपना जो दिया वो हाथ भी अपना ! हवा के रुख मोड़ दो या नव के दिशा बदल दो जीने के लिए लड़ना होगा या फिर जीना छोड़ना होगा !! ए read more >>
मुलाकात होती तू होती तो कुछ बात होती नजरों से नजरों की मुलाकात होती ! रूह रूह से मिलता हमारी मोहब्बत साकार होती !! तू होती तो हमारा � read more >>
रात के तन्हाई में आश्मान में चाँद तारे और सितारें जग मग जग मग टीम टीम करता जुगनू बहु तेरे! मदहोशी में मदहोश अलवेला अल्हड मौसम वसंत� read more >>
किस बात कि अकड़ हैं जो इतना तू अकड़ती हैं! शीशे का तेरा बदन हाथ लगे तो टूट जाएं किस बात की रोष हैं जो इतना तू धधकती हैं!! मैंने तुम को दे� read more >>
समाज के जंजीर में बंधा वेडियों में चुपचाप जकड़ा न टूटता न तोड़ पाता समाज के मिथ्या इजाद ! सत्य पे असत्य का बोल बाला जबरजस्त हैं टुकड़ो read more >>
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