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Rupesh Singh Lostom

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My Articles

मुझे भी अवकाश चाहिए जितना काटना हैं काट लो आपस में सब बाट लो बस एक दिन विश्राम चाहिए ! मैं थक गया हु सब के बोझ उठा के दव गया हु पेड़ पौध read more >>
लेना चाहिए हसने की हमेशा बजह नहीं होती कभी कभी बिना बजह भी हस लेना चाहिए ! ख़ुशी ढूढ़ने कहा जाते हो वो तो हर सैये जर्रा जर्रा में बस ख़� read more >>
जरूर असूलों पे चला होगा तभी उसके पैरों में छाले हैं दुनिया कहा सरीफ़ों को सराफत से जीने देती हैं देख के लगता हैं वो सारा उम्र लड़ता ह� read more >>
बहती जब तू आसूं बनके बहती हैं सच कहु तो मन बेचैन होता हैं दिल उदाश तन बे मौत मरता हैं और तो और जिस्म भी मौन होता हैं मैं अक्सर चुप ही � read more >>
हैं तो हैं वो खफा हैं मुझ से अब खफा हैं तो हैं ना दवा देती हैं ना दुआ ही देती जहर भी कहा देती हैं जहर नहीं देती तो नहीं देती खोई खोई र� read more >>
वक़्त के मासूम ग़जल गुनगुना रहा तो कुछ चुपके चुपके गा रहा सोर में दवा दवा कोयल की बोलियां मन मोह रहा समय के अटल हिदायत इंसान ही बस तो� read more >>
कुछ ऐसा भी होना चाहिए रास्ता बन जाये मंजिल सफर तैये हो जाये इउ ही चलते चलते जिंदगी के पथ पे जिंदगी मिल जाये कुछ ऐसा भी होना चाहिए ! व read more >>
तू हैं तो मगर पास नहीं धड़कनों में जैसे जज्बात नहीं तन्हा तन्हा खोया खोया कोई तुझ में एहसास नहीं तुझ में ही उलझा मेरा जान लेकिन तू म� read more >>
बिंदास उड़ता हैं तू हवाओं में बिना पंख बिंदास उड़ता हैं क्या चाहिए जो इतना बे फ़िक्र आशमान को छूता हैं मैं नहीं जनता क्या चाहिए जो तू read more >>
क्या तू सच में हैं कहा हवाओं में या फिजाओं में या फिर तमनाओ में क्या तू सच में हैं मैं सोचता हूँ पर कहा क्यों कैसे किस लिए तू हैं तो read more >>
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