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Rupesh Singh Lostom

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My Articles

आ ओ थोड़ा मिल जाये आ ओ थोड़ा मिल जाये गगन में फूल सा खिल जाये तोड़ दे जात पात की सदियों से जंग लगा अटूट बेड़ियाँ आ ओ थोड़ा मिल जाये चलो मि� read more >>
तेरा जुल्फ लहराने लगा हैं हुस्न भी बहकाने लगा हैं सच में तेरा रोम रोम जुल्म ढाने लगा हैं वो दुआ करते हैं मैं फना हो जाऊ और मैं दुआ क read more >>
काश तुम तक पहुंच पता मेरी सिसकती आबाज न तन्हां मैं होता न सिकायत होती तुम्हे आज तेरा एक तस्वीर चाहिए थोड़ा सा आँखों का नीर चाहिए जो read more >>
अगर इश्क़ था तो जताया क्यों नहीं अरे पगली कही के बताया क्यों नहीं मैं चाहता हु तू मेरे पास हो मेरे खाबो में ही नहीं हकीकत में भी तू � read more >>
एक दिन आशमा पे छाउँगा जरूर बनके तूफान लौटूंगा जरूर मिटा दूंगा मगरूर घमंड का घमंड फानूस बनके कहर ढाउंगा जरूर हमने तो जलना ही सीखा है read more >>
एक दिन आश्मान पे अपना ही कब्ज़ा होगा लहरों पे भी गूंजेगा अपना ही नाम अपना ही सल्तनत होगा जहा में बस थोड़ा और तराशना हैं अपना हुनर देखन read more >>
तनिक मुकाम पे पहुंच जाये फिर सुनाएंगे दास्ता सफर की क्या क्या छीन गया क्या पाया क्या खोया जटिल सफर में सांसे रुक रही थी कदम थक रहे � read more >>
धुमैल मनवा चादर ओढ़े धुमें मुख छूपाए कण कण को जिअरा तरसे बूंद बूंद पानी को मरे इंसान तन भूखा अन जल को मोर खेतबा करे सिंगार प्रेम क� read more >>
अगर लौटा सको तो वो एह्शाश लौटा दो मीठी मीठी बातें वो अनकही भाव लौटा दो जो साथ बिताया था कभी वो रात लौटा दो थोड़ा सा ही सही मुठी भर जज्ब� read more >>
क्या शातिराना जबाब तेरा बेवफाई को हालत बना दिया मैं आज भी बही बैठा हूँ काश मिल जाये फिर से साथ तेरा नदिया तो बहती बहती रहेगी आँखों � read more >>
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