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Rupesh Singh Lostom
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Rupesh Singh Lostom
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, Uttar Pradesh
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जोड़ जाड़ के-एक दिन सूर्य निकलेगा अपने लिए भी
एक दिन सूर्य निकलेगा अपने लिए भी सुबह की किरणे बिखेरेगा अपने लिए भी अंधकार भरा बादल एक दिन छट जायेगा एक दिन आशमान बरसेगा अपने लिए भी
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आओ न-चलो फिर से थोड़ा जी लें
आओ न चलो फिर से थोड़ा जी लें खुशियों को ख़ुशी भर जी लें चलो उस लम्हो को सच कर लें निर्दोष पल को निर्दोष बन जी लें वो कल बड़ा ही अजीब था मग
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आओ न-खुशियों को ख़ुशी भर जी लें
चलो फिर से थोड़ा जी लें खुशियों को ख़ुशी भर जी लें चलो उस लम्हो को सच कर लें निर्दोष पल को निर्दोष बन जी लें वो कल बड़ा ही अजीब था मगर खु�
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तू जाती हैं-तो जा मेंरा क्या
तू जाती हैं तो जा मेंरा क्या बापस आएगी एक दिन मेरे ही पास मेरा क्या मान की मैं थोड़ा ओल्ड हूँ पर पुराना बाला गोल्ड हूँ और नया से जादे �
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तू समझा कहा हैं मेरी हसरतों को
मैं नाराज हु तेरी बातों से मैं परेशां हु तेरी आदतों से तू समझा कहा हैं मेरी हसरतों को मैं बेचैन हूँ तेरी जीने की उट पटांग वे फ़िक्र अं�
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पता नहीं किस बात से -वो रूठा हैं मुझ से और खफा भी हैं
वो रूठा हैं मुझ से और खफा भी हैं पर किस बात से गुस्स हैं पता नहीं कहता हैं मैं दोस्त हूँ तू मेरे दिल में रहता हैं पर मालूम नहीं क्यो�
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जलेगा चाँद भी-आशमा का रंग बदल रहा थोड़ा थोड़ा
आशमा का रंग बदल रहा थोड़ा थोड़ा पर्वते टूट टूट बिखर रहा थोड़ा थोड़ा लाख पहरे बिठा लो रुत पे वसन्त को क्या डसेगा पतझड़ उसका पता पता बिखर र�
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पगडण्डी सी तू-नींद बेच झुकानी खरीदी ये कैसी महंगाई हैं
नींद बेच झुकानी खरीदी ये कैसी महंगाई हैं तुझसे इश्क़ कर रोज हैं मरते ऐ कैसी जिंदगानी हैं पगडण्डी सी तू आडी टेढ़ी फिर भी तू इतराती है�
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सबाल कई हैं-जो उलझता हैं सपने में भी रुलाता हैं
सबाल कई हैं जो उलझता हैं सपने में भी रुलाता हैं हाँ रुलाता हैं सपने में भी पर सच बताऊ तो सबाल और हैं जो सुलझाने हैं खुद को जवाब बताने
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सबाल कई हैं- जो उलझता हैं सपने में भी रुलाता हैं
सबाल कई हैं जो उलझता हैं सपने में भी रुलाता हैं हाँ रुलाता हैं सपने में भी पर सच बताऊ तो सबाल और हैं जो सुलझाने हैं खुद को जवाब बताने
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