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Santosh kumar koli ' अकेला'

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My Articles

कुछ भी महत्त्व नहीं है। १ बिना तीर कमान का, बिना गुण इंसान का। बिना मौत जान का, बिना भक्त भगवान् का। बिना तृप्ति तर्पण का, बिना मूरत के read more >>
कच्ची मिट्टी, कच्ची चुनाई, घर थे कच्चे। जुड़ाव था मिट्टी से, रिश्ते थे सच्चे। रिश्तों को निभाते नहीं, जीते थे। रिश्ते- रिस, प्यार प्रां read more >>
मन तो मन है, कैसे इसे टोकूं मैं ? रो रहा है हर समां, प्रिय कैसे आंसू रोकूं मैं ? आना था, मुन्ने के नामकरण जश्न में। पहले ही आ गए, लिपट तिरंग read more >>
क़यामत आए तो आए, पर इज़्ज़त रहे साफ़। इस क़ीमत पर बचाकर, क्या कर लेंगे आप? इज़्ज़त की परवाह करने वाला, कुछ नहीं कर पाता है। सिमटकर कोने म read more >>
मनुष्य अपना मित्र व शत्रु खुद होता है। read more >>
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