[email protected]
Join Us:
Home
Category
कहानियाँ
कविताएँ
ग़ज़ल
गीत
शायरी
आलेख
महत्वपूर्ण सूचनाएँ
Topic
धार्मिक
राजनितिक
प्यार-महोब्बत
हास्य-व्यंग
बाल-साहित्य
समाजिक
देश-प्रेम
दुःखद
साहित्य लाइव सूचनाएँ
अन्य
Videos
Others
Search Articles
Latest Updates
Popular Articles
Testimonials
Video Tutorials
Winner List
How to publish articles
My Account
Login
Register New Account
Forgot Password
Login
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक
20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका
साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस
साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
Santosh kumar koli ' अकेला'
Home
Author
Santosh kumar koli ' अकेला'
Santosh kumar koli ' अकेला'
Santosh kumar koli ' अकेला'
@ santosh-kumar-koli
, Rajasthan
Followers:
2
Following:
2
Total Articles:
205
Follow
View Certificate
Share on:
My Articles
आम आदमी
होने को तो सीधा, अपने पर आ बदल दे तख़्त। खुद का नहीं बदलता, औरों का बदल दे वक्त। है तो गूंँगा, बहरा, वक्त पर बोलना रक्त। ऐसे हार का हार,
read more >>
प्रेम हवाल- हवाला
एक था दीया, एक बाती। जीवन रोशन करते, बन जीवन साथी। दीये हिये प्रेम से, लवलीन बाती। हवा हलराती बातें करती, आती-जाती। दीया हिये से उ�
read more >>
जज़्बे की जीत
आती है तो आने दो, आना उनका काम। कसकर बांँध लो मुट्ठी में, क़दम लहरों के वाम। बन लहरी लहरों को, अपने कर लो नाम। हारा कहलाए बेचारा, चल व
read more >>
समय सौदागर
समय, समय आने पर, सबकी गहराई नाप लेता है। समझ नहीं पाता कोई, समय जब चाप लेता है। समय सबका हिसाब, अपने आप लेता है। अर्श गिरे फ़र्श, समय �
read more >>
क़लम का कावा
तलवार से तीव्र, क़लम की धार। सह्य करवाल की, असह्य क़लम की मार। अंत में क़लम के, नीचे आती तलवार। क़लम की मार से, क़लम ही सकती उभार। क�
read more >>
झूठ का पुतला
कोई परोसता, पानी मिला -मिला। कोई ख़ालिस पिलाता, कोई झूठ में झूठ हिला- हिला। कोई झूठ जाम परसता, चखना खिला-खिला। कोई कैसे भी परोस देता,
read more >>
भीड़
सत्य, न्याय, नियम, भीड़ बाढ़ में बह जाते हैं। वही सत्य समझ जाता, जो मूढ़ मुंड कह जाते हैं। भीड़ के रेले से, संहत शजर ढह जाते हैं। भीड़ �
read more >>
सोने की अति
सोना, तू क्यों नहीं रहा सोया? कच्ची नींद जागकर, कहांँ से कहांँ गया? सोना, तू सपने में आता। हाथ नहीं आए, दूर भागता। जब -जब, तू जागा, ग़
read more >>
सीधी टक्कर
सत पथ पर रत, टक्कर जीवन उद्देश्य से। स्व संजात परदा उठे, क्षमता रहस्य से। सलिल में अनल लगा दे, टक्कर चुग़ली तलब से। स्वार्थ चुग्गा च
read more >>
तरणी तड़ाग संवाद
सरसर तरणी तैरती, गहरी झील के सीने पर। गद्गद मद के गद के गद से, खुद के किश्ती होने पर। मुझे सरूर, इसका टूटा ग़रूर, विवश जीवन जीने पर। ए�
read more >>
« Previous
Next »
Showing
1
to
10
of
205
results
‹
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
...
20
21
›
Share on:
Facebook
Twitter
Linkedin
WhatsApp
Pinterest
Telegram
Copy Share Link
Copy
Join Us:
© 2026 |
Sahity Live
®
| All Right Reserved.
A product of
DishaLive™ Group
| Digital Partner:
MyDL.in Website Builder