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Santosh kumar koli ' अकेला'

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My Articles

आपसे दूर, चाहे शरीक हूं। मैं जैसा भी हूं, ठीक हूं। छोटा- बड़ा, अच्छा- बुरा जैसा भी हूं। पर मैं, मैं हूं, चाहे कैसा भी हूं। मेरे जैसा, दूसरा read more >>
पसीने की क़ीमत, किसने आंकी? हाथ कुदाली, सिर पर परात, दिखती श्रम की झांकी। पसीने से ही, धरती का दामन पसीजता है। चोटी से एड़ी का पसीना, धरा � read more >>
चुका उधार पेड़ों से धरती का कर श्रृंगार जीवन पथ मिला ताल से ताल रुकना मत ये संध्या लाली झिलमिल चूनर आभा निराली read more >>
अपनी-अपनी नाप लो, अपनी-अपनी लो तोल। खेल है औक़ात का, औक़ात का है मोल। आज जो जहां खड़ा, पड़ा, मिली जीत या मात है। फूलों का हार पड़ा गले, चाह� read more >>
इस मामले में, मैं ग़रीब हूं। मेरे पास, छल -कपट की दुकान नहीं है। उधार ली हुई, ज़बान भी नहीं है। मेरे पास, बेईमानी की खदान नहीं है। ढोंग-प� read more >>
जागे पक्षी, जागे ढोर। जाग मुसाफ़िर, हो गई भोर। रजनी रानी, रही चादर समेट। उषा लाल वसन, रही लपेट। वसु, अरुण रथारूढ़, निकले तम आखेट। रश्मि � read more >>
कल, कल हो क्यों नहीं जाता? मैं वर्तमान में, रह क्यों नहीं पाता? अनाहूत, ज्यों नटखट बच्चे। दबे पांव, ज्यों देकर गच्चे। सूरजमुखी, ज्यों स� read more >>
हर रोज़ करते, करता है हर एक। नमस्कार, तेरे रूप अनेक। तहज़ीब, तहेदिल से किया, कुंदन रूप है। मतलब का माना जाता, जब दिन में रात, रात में धूप ह read more >>
भारत भविष्य का रेला है। यह, बेरोज़गारों का मेला है। ये आए दिन का हाल है। पानी बोतल, बैग में चड्डी, बनियान रुमाल हैं। कोई सुबह जल्दी आया, read more >>
हम भारत मां के, प्यारे लाल। पहले हिन्दुस्तानी, बाद में और सवाल। जिस पर तुम इठला रहे, कई गुना था हमारे पास। जिसे अपना मान रहे,वह हमारा रह read more >>
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