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क्यों मन आज बहुत विचलित है सांसें अटक गई है आत्मा असंख्य नाद से पीड़ित हैं रोता है मन, पीड़ा पर वार करूं कैसे? हंसती है आज दिशाएं मुझ प� read more >>
छाई है आज लालिमा, पंथ रंजित तन खंडित है। रुक कर कोई देख ले मनुहार तो, किस क्षण कोई लज्जित है इस बार तो। दमन थी तुम्हारी नीति में, कब तक read more >>
जब से जीवन में आते हो, पग पग पर फूल बिछाते हैं। उस बात पर तुम मुस्काते हो, जिस बात पर हम घबराते हैं। कहने को सब कुछ तेरा है, जो मिटा नहीं व read more >>
जो तुम आ जाते जीवन में, संसार सरल हो जाता। अंधेरों की पीड़ा आंखों से, जल धार सम हो जाता। रुक जाते निष्कंटक पंथ निहारूं तो। बेचैनी थम ज� read more >>
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराना भला। मुस्कुराना तो है, एक अद्भभुत कला। ये दुख से उबारा, सुख में जो आया बता ही देगा जीवन की माया। मुस्कुरा read more >>
धरा को नमन कर धरा वासियों। जिसकी गोदी में खेला है बचपन, जिससे उठकर चला तू नमन कर। जिसपे बहती है निर्मल, पवित्र नदियां, जिसकी कल कल सा, read more >>
हंस हंस कर लोग जलाते हैं, धूप में रोशनी दिखाते हैं। आकाश अपना, उसका रंग अपना, कहो धरती पे इसे लाते हैं। सुधा चौधरी बस्ती read more >>
मेरी गहराई ना समझे समंदर कोई, रहे हालात से मजबूर ना मुकद्दर कोई। सामने से ही चले मिट गए पिछले साये, बुझा ले आग सीने की ना हो बंदिश कोई। � read more >>
कभी-कभी शब्दों में, संसार नजर आता है। कभी-कभी शब्दों से, भार बढ़ा जाता है। यह कभी छोटे, कभी व्यापक बन जाते हैं। कहना चाहो जो कुछ, शब्द क� read more >>
मेरे अंतर का सुख मेरा दुख कैसे! जीवन के अनमोल बिंदु से, मैं विचलित कैसे! संशय और समाधान में, बिखरा जीवन पल पल, समय अगर रुक जाए तो, ना सोच� read more >>
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