• जो मर गया अंदर मेरे
• वो जीना चाहता था
• जो दिखा ना सका और तुम्हारी नज़र भी ना गई
• उन सारे ज़ख्मों को खुद से वो सीना चाहता था
• बहुत च� read more >>
कद्र ना की जिसने वक़्त की आज
क्या वक़्त भी कल उसकी कद्र कर पायेगा
ये तो विधि का विधान है, इसे कौन बदल सकता है?
कि जैसा बीज बोएगा तू, वैसा ही � read more >>
कृपाण सा किरदार था, मोम बन गया हु ,
ख़ून की बात किया करता था आज मैं थक गया हू ,
थका क्या शायद में डर गया हू ,
सो(निंद) लू चाहे जितना पर निंद म� read more >>