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खामोशियों, भाग 001 😁 शकुंतला घर से बाहर निकलने ही वाली थी कि जोरों की बारिश शुरू हो गई, हवा जोरों से चल रही थी बादलों की गरजने की आवाजें  � read more >>
सूरज की पहली रोशनी, जब आती सीधी ..! दिखाई देते, मेरे घर के, सामने वाली खिड़की .!! उस खिड़की से, अंगराई लेती हुई बंद आंखें की हुई, सामने नजर आ� read more >>
मुझे देखकर मुझसे ही मेरा पता वो पूछ रही थी । मुझसे बाते करने को जैसे बहाना बना रही थी। कि read more >>
झरनों की धारा बह रही है, गहरी गुफाओं से निकल रही है। ऊँचाइयों से छलकती है वो, हमें आकर बहोता रही है। पत्थरों को छू कर गुज़रती है, प्रकृ read more >>
समुद्र के लहरों की आवाज़ सुनो, जब वे खिलखिलाते हैं और छलकते हैं। वे आते हैं और जाते हैं, निरंतर अपनी कहानी सुनाते हैं। उठती हैं लहरें read more >>
नदी की ओर चलो हर एक कदम पर निर्मलता को देखो पानी की धार जैसे जीवन को बहाती है खुशियों का संगीत गाती है। जलती रवी की किरणों में नदी चमक� read more >>
मैं उस भारत से आती हू जहां पर बचपन में ही बच्चों को खेल -खेल में अपने हिंदू समाज के सभी रीति रिवाजों को बहुत ही अच्छे तरीके से सिखा दिया � read more >>
एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में एक गरीब लड़का रहता था। उसके पिता एक किसान थे और वे अपने छोटे से खेत में काम करते थे। लड़का बचपन से ही read more >>
मुरलीवाले ,साँवरे की , तू .....रे हो ०२३ लीलाधर बावरे की, तू..... रे मन ,लागे राघा रानी , ,रे लागे राघा , साँवरी, यो थारो जोगीपन, यो मन प्रेम को र� read more >>
तुम्हारा था तुमको दे दिया। तुम्हारे लिए ही सब कुछ किया। तुम्हारे नैनो का ही रुप तुम्हारे मन का यह विश्वास तुम्हारा था तुमको दे दिया। read more >>
दुख के पत्ते गिर जाएंगे सुख के नीर भी बरसेंगे जाने वह कौन घड़ी होगी दोनों एक नए होंगे। हारे मन को बांध रही हूं तुममें इनको साध रही हू� read more >>
अरे अधीर हो हमें सहर्ष स्वीकार हो तो। तुम्हें मिलेंगी मेरे पथ से नई उमंगे चितवन की इस नई चाह से मेरे मन में झांको तो। मुझ में ही तो बां read more >>
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