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छोटी सी जिंदगी दुख ज्यादा, क्यूंकि पाप करने बाला लोक ज्यादा! read more >>
अंधेरों में शाम की तलाश तेरी फिजाओं में गुमसूम सी आवाज तेरी मौजूद है, जिंदगी में सभी कैद हुऐ हम जंजिरो में अरमानों में रोशनी तेरी फि� read more >>
कविता -मन के मुलायम चल कर अपने जीवन पथ पर बदला समाज अपने बल पर निज प्यार लुटाया कर भरकर की राजनीति खूब चढ़ बढ़कर अर्पित है सुम� read more >>
भबिष्य के बारे मैं जो नहीं सोचता, बो बर्तमान मैं ही रह जाता है, बाद मैं आगे पश्चताप करने के अलाबा उसे कुछ प्राप्त नहीं होता है ! read more >>
मेरी गलीयों से गुजरी हवायें काली मेंघन बरसे भिंगे फिजाऐ कहते है, बन्दे सभी पंख मिले तो उड़ चले हम आसमान की ऊंचाई में, ईरादे टूटी हुई ब read more >>
कई वर्षों से देखा चला आ रहा हूँ उस पुराने बूढ़े वृक्ष को। कभी उस पर भी हरियाली थी। बैठे रहते थे उस पर बंदरों का समूह, गाते थे उसपर पंछियो read more >>
अब ऐसा बक्त आया' दिन बिताने से नहीं, दिन बीत जानेसे अच्छा लगता है जनाब! read more >>
वक्त के साथ नहीं वक्त का पहचान नहीं रहा वक्त कभी अकेला नहीं वक्त ठहेरता ही नहीं read more >>
अपने आप में ही खो जाना मेरा कभी हंसना तो कभी रो जाना मेरा कोरा कागज़ सा सादा सादा कभी रंग बिरंगी किताब हो जाना मेरा किस तरफ है सफ़र क� read more >>
कदमों मेरे छालै "जख्म दिल" के नहीं दिखाने वाले ये "दर्द "मेरा मुकद्दर.......तु क्या..........? नाम तेरा.... मेरे लब्जो मे... रहे .... ये..... नाम..... read more >>
जिंदगी का हाल पूछे कौन, किस्सा ही अजीब रही, जिसे ढंढने चला, उसने सफर छोड़ दिया| read more >>
खामोश थे ,शब्द उसके छाई थी! उदासी ,सी पास बैठ थे! हम भी, पर उसे ,पता नहीं ! ये क्या कोई दर्द था , या दिल्लगी तब से हम भी, ये ही सोच रहे है! read more >>
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