महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी 19 Jun 2026 कविताएँ समाजिक #पहाड़ीटोपी 241 0 Hindi :: हिंदी
पहाड़ी टोपी पहाड़ों की पहचान है, टोपी पुरखों का सम्मान है, टोपी आज का अभिमान है टोपी भविष्य का अरमान है टोपी। देश के गौरव का प्रमाण है, टोपी हिम वीरों की जान है, टोपी। गंगा-जमुना का परिधान है, टोपी हमारी संस्कृति की शान है, टोपी। पहाड़ों की माटी से जो जुड़ा है, वो इस टोपी को सदैव पहना है, देव-भूमि के देवदूतों का यह एक पवित्र गहना है। इसे पहनने का भी एक तरीका है, जिसे बड़ा, छोटे को सीखाता है, इसका धीरे-धीरे तिरछा होना ढलती उम्र को दिखाता है। सर्दी हो या तपती गर्मी हो, सहती हर तापमान है, टोपी देश, विदेश में भी पहाड़ों की कराती पहचान है, टोपी। पहनने वालों की शोभा खूब बढ़ाती है, टोपी एकता और अखण्डता का पाठ पढ़ाती है, टोपी। रचनाकार- महेश्वर उनियाल 7579155644