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शान तिरंगे की

महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी 19 Jun 2026 कविताएँ देश-प्रेम #शान तिरंगे की #भारतमां #पुष्प 516 0 Hindi :: हिंदी

‘‘शान तिरंगे की’’

भारत मां तेरे आंचल में
मैने जन्म लिया है,
जन्म भूमि तूही,
कर्म भूमि तूही।

तुझको ही अपना
सर्वस्व दिया है,
मातृ भूमि तूही
पितृ भूमि तूही।

तू मेरा आधार है
तू है मेरी प्रतिपाला,
तुझे पहना दूं मै,
पुष्प भरी यह माला।

तेरी रक्षा करना हमें
पुरखों ने सिखलाया है,
तेरी लाज बचाने खातिर
आज सौगन्ध खाया है।

अंगारों का शोला हूं मै
तलवारों की धार हूं,
तोप का गोला हूं मै
दुश्मन का संहार हूं।

बुरी नजर जो डालेगा
बुरी तरह पिट जायेगा,
दुनिया के नक्शे से उसका
निशान ही मिट जायेगा।

लहू बहाया जिसने भी, या
बलिदान किया तेरे लिए,
एक के बदले दस काटूगां
दुष्मन के सिर तेरे लिए।

भारत माता तुझ पर मै
अपनी जान तक लुटाउंगा,
विश्व विजेता होकर तेरा
तिरंगा गाढ़ के जाउंगा।
तिरंगा.................।

रचनाकार -
महेश्वर उनियाल

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