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जो वीर थे-आओ चलो मिल के करे नमन उन्हें
आओ चलो मिल के करे नमन उन्हें जो वीर थे रणधीर थे माँ के दुलारे धरनी के लाल थे जिन्हे हम भूल गए धरती माँ के सिंगार थे आओ चले लहुं लुहा�
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वरपेगी-वो रुत बन के आई
वो रुत बन के आई रुत सी ही चली गई न फुहार बन बरसी बिन गरजे चली गई मैं सोचता ही रहा वो सैलाव बन के वरपेगी और मुझे अपने साथ अपने आगोश में
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जोड़ जाड़ के-एक दिन सूर्य निकलेगा अपने लिए भी
एक दिन सूर्य निकलेगा अपने लिए भी सुबह की किरणे बिखेरेगा अपने लिए भी अंधकार भरा बादल एक दिन छट जायेगा एक दिन आशमान बरसेगा अपने लिए भी
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आओ न-चलो फिर से थोड़ा जी लें
आओ न चलो फिर से थोड़ा जी लें खुशियों को ख़ुशी भर जी लें चलो उस लम्हो को सच कर लें निर्दोष पल को निर्दोष बन जी लें वो कल बड़ा ही अजीब था मग
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इक बोझ दिल पर लिए जी रही हूं-घुंट आंसुओं का रोज पी रही हूं
इक बोझ दिल पर लिए जी रही हूं घुंट आंसुओं का रोज पी रही हूं मेरे अपने ही कहते हैं सब कुछ ले लिया मैंने उनके हिस्से का तु ही बता दें मां अ�
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सिर्फ पांचवी पास -ग्रामीण अंचल में एक बड़े से घर के चौक में
ग्रामीण अंचल में एक बड़े से घर के चौक में चौकी बिछाए बैठी चांद जैसे आभामंडल मुख पर लिए बिल्कुल साफ स्वच्छ वस्त्र पहने चरखे पर सूत कातत�
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सिर्फ पांचवी पास -ग्रामीण अंचल में एक बड़े से घर के चौक में
ग्रामीण अंचल में एक बड़े से घर के चौक में चौकी बिछाए बैठी चांद जैसे आभामंडल मुख पर लिए बिल्कुल साफ स्वच्छ वस्त्र पहने चरखे पर सूत कातत�
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मेरे सपनों में तुम रहे ऐसे-मैंने सपना नहीं कहा तुमसे
मैंने सपना नहीं कहा तुमसे मेरे सपनों में तुम रहे ऐसे मुझ में समुद्र की वीरान सी लहरें आती-जाती रही जैसे। मेरी आंखों से होकर ख्यालों �
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बैंकों की कुव्यवस्थाएं-बैंकों के प्रबंधकीयवर्ग को हरेक ऋण-प्रदायगी के लिए
बैंक लुटेरे विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विक्रम कोठारी और पीएमसी का मामला सुलझा नहीं है कि बैंकिंग क्षेत्र में एक और महाघोटाला
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बीते दिन लौटे नहीं-यही बात है खास
बीते दिन लौटे नहीं,यही बात है खास। करें समय से काम सब,छोड़ें कभी न आस।। बीते दिन लौटे नहीं, पूर्ण सत्य यह बात। सुन्दर निर्मल कर्म हों,प
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प्रेम जगत का सार है-जन जन में हो प्यार
प्रेम जगत का सार है, जन जन में हो प्यार। खुशियों में जीवन कटे, दुनिया हो गुलजार।। प्रेम जगत का सार है,इससे ही संसार। मनुज जन्म हो सफल त�
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दिन दिन बढ़ती जा रही- दुनिया में तकलीफ
दिन दिन बढ़ती जा रही, दुनिया में तकलीफ। तरह तरह के रोग से, मिले नहीं तारीफ।। दिन दिन बढ़ती जा रही,सब चीजों की मूल्य। आफत यह है जो बड़ा, �
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