काया माटी की, ये तो सब जाने,
पर भीतर छुपा कोई और खजाना।
ना कोई रंग, ना कोई आकृति,
वो शुद्ध चेतना है, अमर ज्योति।
हर जीव में समाया वो परम स read more >>
जोश-ए-परवाज़ हो तो आसमाँ भी छोटा है,
कोई चोटी नहीं अरमानों से ऊँचा शिखर।
वो तलाश-ए-सुकूँ जो दिल में ठहरी है अब,
नहीं सागर से गहरा, है मोह� read more >>
हर शय में वो नूर, वो एक ही चेहरा,
पर आदमी ने कहाँ इत्तेहाद देखा रे।
मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरूद्वारे की क्या बात,
हर दिल की धड़कन में मैं� read more >>
ज़मीं ये आसमाँ का हर नज़ारा उसी से,
जो गुमसुम हों, मिला हर सहारा उसी से।
कोई सहरा में भटके तो, मंज़िल बता दे,
जो हर मुश्किल में रहे, वो क� read more >>