मतला:
कभी-कभी ख़ामोशी भी बयान बन जाती है,
हर अनकही सी बात पहचान बन जाती है।
लबों पे जो न आए, वो नज़र कह जाती है,
चुप्पी भी दर्द की ज़ुबान � read more >>
यू ही में कभी घूमने निकल जाता हू
ऊब जाता हू अपने आप से तो घर से निकल जाता हूं
सफर करता हूं बस में तो नईं बात संजो लेता हूं
ओर देखने जा रह� read more >>
गीत(मुखड़ा)
मेरे मन के अंँधेरे में, तू ही तो रोशनी है
जीवन के हर मोड़ पर, तेरी ही बंदगी है
दिल की आंँखों से देखूंँ, बस तुझको हरदम
तू ही म� read more >>