" जुगनुओं ने शराब पी ली है.."
(✍️तीखा व्यंग्य - के. भारद्वाज)
जुगनुओं ने शराब पी ली है,
अब ये सूरज को गाली देंगे,
दो घूंट सत्ता की, तीन झूठ ता read more >>
"✍️निर्णय और समय - के.भारद्वाज"
कल जो निर्णय था -
वह तब सही था,
भले ही आज
उसके मायने बदल गए हों।
आज जो ठाना है मन ने,
वह अब सही है,
भविष्य म� read more >>
कविता: 🏅 “खेल का दीप जलाओ” 🏆
मैदान बुला रहा है तुमको, आओ खेल दिखाओ,
दिल में जोश, आँखों में सपना - आगे कदम बढ़ाओ।
पसीने की हर बूँद यहाँ, मे� read more >>
*"वक़्त की स्याही में लिपटी ज़िंदगी"*
किसी ने आज हंसकर पूछा, "कौन है वो.?"
हम भी मुस्कुराए, मगर जवाब यूँ दिया—
"किसी के कानों की बाली में जड़� read more >>
नील गगन के नीचे, जलधारा के बीच,
एक नाव चली, बहती रीतम - रीत।
नाव की देहरी पर बैठी कोई,
मानो स्वप्नों से आई जलपरी।
नयनों में गहराई, लहरों-� read more >>
शक्ति के प्रेम में शिव भी बदल गए थे,
वैरागी से किसी के हमसफ़र बन गए थे।
जो ध्यान में लीन, विरक्त थे सदा,
प्रेम के स्पर्श से शक्ति के हो गए read more >>