मैं देख रहा हूं हर बार की तरह,
इस बार भी 'बार' सजेंगे।
अमीरों का जश्न रात भर,
गरीब की ठिठुरन पर भारी पड़ेंगे।
कैलेंडर की तारीख भी बदल जाए� read more >>
आपसे पहले जन्मी मैं,
और आपको पाला-पोसा।
जब बढ़ रहा था मरूस्थल,
तो मैंने ही उसे रोका।
आज मैं छोटी हो गई,
और तुम हो गए बड़े !!
आंधियों को अप� read more >>
जादूगरी का अनोखा सफ़र
लेखक: विजय शर्मा Erry
कहा जाता है कि हर इंसान के जीवन में एक ऐसा मोड़ आता है, जहाँ उसे लगता है कि अगर थोड़ा-सा जादू मि� read more >>