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है तो चालाक, मगर दिखता है नादान बहुत या तो खुदा है वो,या फिर है ,शैतान बहुत उसके दिल में है क्या,उसका तो खुदा ही जाने पर वो लहज़े से तो, ल� read more >>
खुदा भी आयेगा न तुझको, बचाने के लिए जरा सम्भल के आना , मुझको डुबाने के लिए तू जानता है मैं तुझको नहीं, समझता कुछ तू जो भी होगा और होगा,ज� read more >>
पडौसी से ऊंचा, मकान कर रहा है नहीं जितना उतना गुमान कर रहा है किसी को किसी का, सुहाता नहीं सुख आदमी, आदमी को, परेशान कर रहा है कोई कीमत ग read more >>
आंखों की क्या कसूर, जब तुम इतनी खूबसूरत हो ‎तो तुम्हें देखेगा ही, दिल की क्या कसूर, ‎जब तुम्हारी सुर्ख़ियों में इतनी मिठास है ‎तो धड� read more >>
बारिश से टूटा अपना मकान, लल्ला छुट्टी आएगा, घर की मरम्मत कराएगा। चश्मा हुआ मेरा पुराना, बंद हो गया है दिखाई देना, लल्ला छुट्टी आएगा , � read more >>
हमारी अलमारी में तो नये कपड़े भरे रहते हैं, पर माँ आज भी उसी घिसी चप्पल में चलती है… क्योंकि उसे डर है कि कहीं उसके एक नए जोड़े से हमारी read more >>
कहीं दूर से आवाज है आई, कभी तो अपने लिए जी ले मेरे भाई। खुद को नीलाम कर जो जमा की है तूने पाई -पाई, एक दिन दुनिया छोड़ चला जाएगा तू, यही रह � read more >>
स्त्री इतनी क़ैद है कि उसके चारों ओर नज़रें हैं, दीवारें हैं, रिश्तों के नाम पर लगी हुई ज़ंजीरें हैं। हर सुबह वह उठती है, सबके लिए चाय � read more >>
कहीं एक खालीपन था, जो भर नहीं पाया, एक चेहरा अपना–सा था, जो सच में अपना बन नहीं पाया। सुबह की पहली धूप में भी तेरी ही कमी सी लगी, भीड़ के ब� read more >>
साहित्य का श्रृंगार शब्दों से होता है ! और आज का नौसिखिया कवि कविता के नाम पर सिर्फ तुकबंदी बोता है !! बेहूदा चुटकुले और मंच की नौटंकिय� read more >>
जंगल की पगडंडी पर, एक दूब-सा कोमल बालक, सूखे पत्तों की सरसराहट में सपनों का गूंथता था मालक। मगर सपने उसके छोटे न थे, ना डराए उसे कोई तू� read more >>
पडौसी से ऊंचा, मकान कर रहा है नहीं जितना उतना गुमान कर रहा है किसी को किसी का, सुहाता नहीं सुख आदमी, आदमी को, परेशान कर रहा है कोई कीमत ग read more >>
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