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किसी से अब कोई शिकवा नहीं,गिला नहीं...... जो मेरा नहीं था शायद वो मुझे मिला नहीं....!!! read more >>
"रूह"मैं क्षणिक क्षण भुंगर नहीं मैं यथार्थ सत्य हूं किन्तु तुमको दीख ता जो मैं वही असत्य हूं' हूं चराचर में रमा क्या कोई मुझको जानता ह� read more >>
छप्पर वाले.... छप्पर वाले यार पुराने आंगन में औस टपकती रात सिराहने आंगन में चादर में ढकता हूं तन जैसे तैसे कैसे सोऊं रात बिताने आंगन मे read more >>
अजीब है ना... कल जो कहा करते थें कभी छोड़ कर नहीं जाऊंगा..!! आज छोड़ के जाने के कतार में सबसे पहले वही लोग आते हैं..!! Thanks read more >>
जो चला गया उसके लिए रोना क्या..?? जो है उसे संभाल कर जीना सीखो..!! धन्यवाद read more >>
"क्यों तरसता तरसता है आदमी", इस बड़े शहर की क्या कहूं दास्तान ना पेट में खाना है ना है सर पे मकान तन पे कपड़े नहीं सामने है दुकान कैसे ज� read more >>
"पंजाबी गीत" आई यार बैसाखी..... आई यार बैसाखी आई यार बैसाखी अखियां है नूर दी प्यासी आई यार बैसाखी आई यार बैसाखी........ 1- पिंड पिंड मेले read more >>
"फिल्म वेलकम टू उत्तराखंड" फिल्म"वेलकम टू उत्तराखंड", को इतना प्यार,सहयोग देने व सराहना करने हेतु सभी दर्शकों का तहे दिल से शुक्रिया। द read more >>
"मैं कुछ बेहतर नहीं लिखता" मैं कुछ बेहतर नहीं लिखता यूं ही जिस ओर देखता हूं, दर्द में डूबे लोगों की "आह" जब भीतर उतरती है निकाल लाती है व read more >>
ક્યારેક હળવા ફૂલ છે, તો ક્યારેક ઘા કરી જાય છે, આ શબ્દો જ છે જે શ્વાસમાં ધબકાર ભરી જાય છે. ​નથી હોતું કોઈ શસ્ત્ર કે નથી હોતી કોઈ ધાર એમાં, read more >>
ये उम्र भी गुजर रही हैं, अब तो हम किसी से कुछ कह भी नहीं सकते.......!! मर गई हैं ख्वाहिशें सारी, अब तो खुद को ज़िंदा कर भी नहीं सकते..,....!!! सांसे ह read more >>
तुम रूप का भंडार लिए सोनभद्र नदी बनी मैं छोटा सा आकार लिए एक बूंद जल बना। तुम भिन्न-भिन्न श्रंगार किए एक गंगधार बनी मैं सिर्फ ठूंठ पत्� read more >>
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