सुनो 🙉
हमारे समाज का हकीकत कुछ ऐसा है
शुरुआत में एक बेटी' बाप पापा' की परी और बेटा 'मां का राजा' होता है !
फिर वक्त ने ली करवट
25 की उम्र आते read more >>
(Verse 1 – Soft)
चल पड़े हैं रास्ते फिर से पुकारते,
टूटे सपने भी आज साथ चल पड़े।
धूप है तो क्या हुआ, छाँव बन के तू बढ़,
हार के भी जीता है, जो खुद से क read more >>
मेरे ताबूत में न केवल मेरा शरीर आखिरी बार जलेगा, बल्कि मेरा पाना और न पाना, असंख्य हंसी और आंसू, सपने, प्यार, ये सब हवा के साथ गायब हो जाएं� read more >>
अमृत कल हो चुका शुरू अब बारी नई हवाओं की है,
पूर्वजों से बनी बुनियाद अब बारी हम युवाओं की है,
यह सब है यहां बैठे हर युवा की भुजाओं पर,
तुम read more >>