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सोशल मीडिया ने दिमाग हिला दिया। जो कहती थी आंगन टेढ़ा है, कैसे नाचू। इंस्टाग्राम ने उनको भी नाचना सिखा दिया।। read more >>
गलती थी तुम्हारी जो पत्थरों से प्यार किया। हमने भी तुमसे कई बार इजहार किया। जब धोखा मिला तो रोने लगी। अब तुमको भी एहसास हुआ जब अपनी म� read more >>
जीवन से बड़ा कोई विद्यालय नहीं, ये सिखाता दर्द भी, हिम्मत भी, ताल भी। हर सुबह नई लड़ाई, हर रात नया सबक, जो भागेगा इससे—वो रह जाएगा फँसकर। read more >>
अनुमान तो बस दिमाग की एक चाल है, आज सही—कल पूरी तरह बेहाल है। पर अनुभव… वो आग है, जिसमें जलकर इंसान स्टील बनता है। अनुमान बहकाता है, क� read more >>
हमेशा सोच जीत की रखो, हर मंज़िल का दरवाज़ा खुलता है; जो रातों में जलता रहता है, सुबह वही सूरज बनकर मिलता है। कदमों में दम, दिल में ज़ोर, read more >>
“सब कुछ फिर से शुरू करने से मत डरो; हो सकता है आपको अपनी नई कहानी अधिक पसंद आए” — यह पंक्ति हमें बताती है कि असफलता या मुश्किलों से डरने क read more >>
तेरे अंजुमन में कैद है मेरी हर तमन्ना मैं दिवाना तेरे गालियों का हूँ, यूँ मुसाफ़िर ना समझना । बागो में घूमता फिरता मैं बनके अफ़साना read more >>
हाथों में छाले, उदर में भूख ; नेत्रों में निद्रा, नीर को आतुर कंठ चुका है सूख, मजदूरी किसी का शौक है क्या? घर का राशन, बच्चों की शिक्षा; प read more >>
हाथों में छाले, उदर में भूख ; नेत्रों में निद्रा, नीर को आतुर कंठ चुका है सूख, मजदूरी किसी का शौक है क्या? घर का राशन, बच्चों की शिक्षा; प read more >>
नफरत की औकात नहीं, कि मोहब्बत से जीत सके। अंधेरे में दम नहीं , कि उजाले से लड़ सके।। read more >>
त्याग तो करना होगा, नींद का या फिर सपनों का— जो आराम से समझौता कर बैठा, वो मंज़िल से हाथ धो बैठा। यह दुनिया तकिए नहीं देती, यहाँ बिस्तर read more >>
जिंदगी ने क्या खेल खेले हे मेरे साथ जो पूरा नाकर सखी वो सपने दिखाए है । उमीदे उभलकर बिखर गए आग बनकर खाक होगए । फिर भी सात था अपनो का � read more >>
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